मंडी, फरेंद्र ठाकुर। कुल्लू के उपमंडल बंजार क्षेत्र की पल्दी घाटी में करथा और वासुकी नाग को समर्पित पल्दी फागली उत्सव में प्राचीन दैवीय परंपरा का निर्वहन किया गया। अश्लील जुमले कसते हुए ढोल नगाड़ों की थाप पर हारियानों ने मडियाहला (मुखौटा) नृत्य किया। इस परंपरा को देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ी। इस फागली उत्सव में क्षेत्र के विशेष देवताओं से जुडे़ लोगों व कारकूनों ने विशेष परिधान पहनकर परंपरा निभाते हुए अश्लील जुमले सुनाए।

 आधी रात के बाद उत्सव के दौरान मरोड गांव से 100 फीट लंबी जलती मशाल ढोल नगाड़ों के साथ थाटीबीड गांव लाई गई। मुखौटाधारियों हारियानों ने इस दौरान दहकते अंगारों पर कूदकर नृत्य किया। यह देख लोग दंग रह गए। इसके अलावा देवता के गूर सर्दी में ठंडे पानी के कुंड में दिनभर खडे़ रहे और आम लोगों को आशीर्वाद देते रहे। दोपहर बाद थाटीबीड गांव में नरगिस के फूलों से तैयार किए गए विष्णु अवतार चिह्न को बांगी नामक खुले स्थान पर नचाया गया।

फागली उत्सव की शोभा बढ़ाने के लिए घाटी के पटौला, नरौली, शिकारीबीड, घमीर, मरौड, गांव से दर्जनों देवलू मुखौटे पहन कर देवप्रथा का निर्वहन करने थाटीबीड पहुंचे थे। यह विशेष फागली उत्सव संक्रांति से शुरू हुआ। इसमें वासुकी नाग के कोठी प्रांगण में अलाव जलाकर सैकड़ों देवलू रातभर बैठे रहे। 

इस दौरान साठ मुखौटाधारियों ने देवता करथा नाग व वासुकी नाग के समक्ष रामायण व महाभारत काल के युद्ध का वर्णन कर नृत्य किया। देव परंपरा के अनुसार यह उत्सव देवताओं व राक्षसों के रामायण व महाभारत काल के युद्ध के स्वरूप को दोहराता है। खास कर समुंद्र मंथन का जिक्र भी इस उत्सव में होता है।

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यह है मान्यता

मान्यता है कि पौष माह में यहां के देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर होते हैं और क्षेत्र में बुरी शक्तियों का वास रहता है। देवता करथा नाग व वासुकी नाग तथा इनके सहायक देवता आहिडू महावीर, सिहडू देवता, गुढ़वाला देवता, खोडू दंईत देवता इस करथा उत्सव में इन  राक्षस रूपी मुखौटों के साथ नृत्य कर और अश्लील जुमलों के जरिये बुरी शक्तियों को भगाते हैं।

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Posted By: Babita kashyap

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