3 रुपये की सिरिंज 20 में 15 के ग्लव्स 60 में, मंडी के अस्पतालों में मेडिकल कंज्यूमेबल्स के नाम पर मरीजों से लूट
मंडी जिले के निजी अस्पतालों में मरीजों से मेडिकल कंज्यूमेबल्स और इंप्लांट्स के लिए थोक मूल्य से कई गुना अधिक दाम वसूले जा रहे हैं।
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मंडी में निजी अस्पतालों की मनमानी पर उठे सवाल।
HighLights
निजी अस्पताल थोक मूल्य से 3-4 गुना अधिक वसूल रहे दाम
सिरिंज, ग्लव्स, आईवी सेट पर एमआरपी छूट का झांसा
इंप्लांट की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी उठ रहे सवाल
जागरण संवाददाता,मंडी। जिले के निजी अस्पतालों और उनसे जुड़े मेडिकल स्टोरों पर इलाज कराने पहुंच रहे तीमारदारों और मरीजों की जेब पर मेडिकल कंज्यूमेबल्स का भारी बोझ डाला जा रहा है।
उपचार में नियमित रूप से इस्तेमाल होने वाले ग्लव्स, सिरिंज, आईवी सेट, कैथेटर और आक्सीजन मास्क जैसी आवश्यक वस्तुओं की वास्तविक थोक कीमत और मरीज के अंतिम बिल में जमीन-आसमान का अंतर सामने आ रहा है।
आंखों में धूल झोंकने के लिए प्रिंट रेट (एमआरपी) पर 10 से 15 प्रतिशत की छूट दिखाई जाती है, लेकिन असलियत में थोक दरों से तीन से चार गुना अधिक दाम वसूले जा रहे हैं।
सिरिंज और आईवी सेट पर तीन गुना तक वसूली
सदर मंडी और आसपास के निजी स्वास्थ्य केंद्रों व दवा दुकानों की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। थोक बाजार में मात्र 3 से 5 रुपये में मिलने वाली सिरिंज के मरीज से 15 से 20 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
इसी प्रकार, 20 रुपये की लागत वाले आईवी सेट (ग्लूकोज चढ़ाने वाली नली) का बिल सीधे 80 से 100 रुपये थमाया जा रहा है। गंभीर स्थिति में पहुंचे तीमारदार बिल पर बहस करने की स्थिति में नहीं होते, जिसका सीधा फायदा उठाया जा रहा है।
पैकेज सिस्टम की आड़ में पारदर्शिता गायब
सुंदरनगर उपमंडल के निजी अस्पतालों में इलाज के तय ‘पैकेज’ की आड़ में खेल चल रहा है। यहां सर्जिकल सामान को कुल पैकेज में शामिल कर दिया जाता है।
जिससे तीमारदार को यह पता ही नहीं चल पाता कि किस सर्जिकल आइटम का वास्तविक मूल्य क्या है। विस्तृत बिल मांगने पर अस्पताल प्रबंधन टालमटोल की नीति अपनाते हैं।
15 रुपये का सर्जिकल ग्लव्स 60 रुपये में
मेडिकल हब के रूप में उभर रहे नेरचौक और सुंदरनगर बेल्ट के निजी क्लीनिकों में मनमानी का आलम यह है कि 12 से 15 रुपये प्रति जोड़ी की थोक कीमत वाला सर्जिकल दस्ताना (ग्लव्स) मरीज के खाते में 50 से 100 रुपये में दर्ज किया जा रहा है।
कैथेटर और आक्सीजन मास्क के दामों में भी 200 से 300 प्रतिशत तक का मुनाफा काटा जा रहा है।
देसी-विदेशी के नाम पर इंप्लांट में खेल
कंज्यूमेबल्स के अलावा स्टंट व अन्य आर्थोपेडिक व कार्डियक इंप्लांट्स में भी भारी अनियमितता है। इंप्लांट की वास्तविक गुणवत्ता और प्रमाणिकता की जानकारी तीमारदारों को नहीं दी जाती।
केवल ''देसी'' और ''विदेशी'' का ठप्पा लगाकर लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग की ढिलाई के चलते निजी स्वास्थ्य संस्थानों की यह मनमानी बेरोकटोक जारी है।
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