6 साल की उम्र में गंवाए दोनों हाथ, नशे का दलदल छोड़ बना युवाओं का मसीहा; भावुक कर देगी मंडी के जतिन की कहानी
मंडी के नागचला के जतिन ने शारीरिक लाचारी और नशे की लत को हराकर युवाओं के लिए मिसाल कायम की ...और पढ़ें
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मंडी के जतिन की प्रेरक कहानी।
HighLights
जतिन ने शारीरिक लाचारी और नशे की लत को हराया
30 युवाओं को नशा छोड़ने में मदद की, प्रेरणा बने
नागचला में अपना नशा निवारण केंद्र खोलने की तैयारी
मुकेश मेहरा, मंडी। छह वर्ष की आयु में करंट लगने से दोनों हाथ गंवा दिए। कालेज गए तो ड्रग की लत ने जिंदगी तबाह कर दी, लेकिन मंडी जिले के नागचला गांव के 25 वर्षीय जतिन ने दृढ़ निश्चय से शारीरिक लाचारी और नशे की आदत, दोनों को हरा दिया। नशे के दलदल से खुद को बाहर निकाल वह युवाओं के लिए मिसाल बन गए।
उनके जनजागरूकता अभियान से जुड़कर 11 दोस्तों समेत कुल 30 युवाओं ने पहले खुद ड्रग का सेवन छोड़ा दिया है और अब सब मिलकर अन्य लोगों को नशे से दूर कर रहे हैं। इसके लिए जतिन अब नागचला में ही नशा निवारण केंद्र भी खोलने वाले हैं। ये सभी लोग नशे की गिरफ्त से निकलने के बाद के जीवन को खुद का नया जीवन मानते हैं। यही वजह है कि उसी तिथि पर पुनर्जन्म तिथि मनाते हैं। जतिन ने 11 अगस्त को ही अपनी चौथी पुनर्जन्म तिथि मनाई है।
जतिन के सिर से मां का साया बचपन में ही उठ गया था। पिता ने पालन-पोषण किया। 17 वर्ष की आयु में कालेज पहुंचे तो पहले शराब, फिर चरस और अंत में ड्रग की लत लग गई। हालत इतनी खराब हो गई कि नशे के बिना एक पल रह नहीं पाते थे। पिता कुशाल चंद चौधरी ने जतिन को शिमला नशामुक्ति केंद्र भेज दिया। उपचार के दौरान ही पिता का निधन हो गया।

बकौल जतिन, 'इस झटके से मेरी जिंदगी के मायने ही बदल गए। उस समय अहसास हुआ मैं किस गर्त में हूं। एक वर्ष नशामुक्ति केंद्र में रहने के बाद मैंने ड्रग का सेवन पूरी तरह छोड़ दिया। इसके बाद निश्चित किया कि मैं जिस दलदल में फंसा था, उससे अन्य को भी निकालूंगा। निर्णय के बाद मैंने जागरूकता अभियान शुरू किया।
ड्रग किस तरह जिंदगी बर्बाद करता है, यह पहले अपने साथियों को समझाया, फिर अन्य को। नतीजा यह हुआ कुछ दोस्त भी इस लत से बाहर आ गए। साथ ही देखते-देखते जागरूकता अभियान चलाने वालों का काफिला 30 लोगों तक पहुंच गया।'
जतिन के मुताबिक लोगों को नशामुक्त करने का सफर अब भी जारी है। मंडी कालेज के विद्यार्थियों और कनैड़ पंचायत में पुलिस विभाग के नशा विरोधी अभियान में लोगों को जागरूक किया। कनैड़ पंचायत में उनके अभियान का असर यह हुआ कि छह युवा चिट्टा छोड़ चुके हैं, जिनमें से दो नशामुक्ति केंद्र में हैं। आने वाले दिनों में पुलिस की मदद से जागरूकता अभियान अन्य क्षेत्रों में भी आरंभ करेंगे।
युवाओं को इस दलदल से बाहर निकालने के लिए वह अपनी जिंदगी में हुए नुकसान और नशा छोड़ने के तरीके बताते हैं। इसी कड़ी में अब हम सभी मिलकर नशा निवारण केंद्र का संचालन करने वाले हैं। मंडी के अलावा हमीरपुर व बिलासपुर के युवा भी उनसे जुड़े हैं।
दोस्त कर रहे मदद

जतिन बताते हैं कि नशामुक्ति केंद्र खोलने के लिए उन्होंने किसी तरह की भी सरकारी या किसी संस्था से सहायता नहीं ली है। अपने स्तर पर ही नशामुक्ति केंद्र पर खर्च कर रहे हैं। इसमें लगभग आठ से नौ लाख रुपये का खर्च होंगे, जिनमें 50,000 रुपये प्रतिमाह किराया भवन का है। इसमें दो बड़े हाल और कमरे शामिल हैं। दोस्त नशामुक्ति केंद्र स्थापित करने में मदद कर रहे हैं। नशामुक्ति केंद्र में शराब, चरस, चिट्टा के अलावा अन्य नशा करने वालों को भी दाखिल किया जाएगा।
चित्रकार बनने का था सपना

दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद जतिन को चित्रकला का शौक था। वह चित्रकारी करते थे, लेकिन नशे की लत ने उनसे यह कला छीन ली। अब नशे के विरुद्ध लड़ने के लिए उनको नई दिशा मिली है।
नागचला में शुरू होने वाले नशा निवारण केंद्र के भवन का निरीक्षण कर लिया गया है। अन्य जरूरी पड़ताल कर इस संबंध में रिपोर्ट स्टेट मेंटल हेल्थ अथारिटी शिमला को भेज दी गई है। -डॉ. दिनेश ठाकुर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मंडी।
