जागरण संवाददाता, मंडी : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मंडी ने उच्च क्षमता चिप निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी तैयार करने की पहल की है। सेंटर फार डिजाइन एंड फैब्रिकेशन आफ इलेक्ट्रानिक डिवाइसेस (सीडीएफइडी) के संयोजन से दो दिवसीय वर्चुअली अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उच्च क्षमता स्वदेशी चिप निर्माण पर चर्चा शुरू हुई। नीति आयोग के सदस्य डा. वीके सारस्वत संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में लिया भाग। संगोष्ठी की अध्यक्षता आइआइटी मंडी के प्रोफेसर रहे व सेमीकान फैब प्रौद्योगिकी में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ प्रोफेसर केनेथ गोंजाल्विस ने की।

डा. वीके सारस्वत ने कहा कि कोरोना महामारी ने इंटरनेट कनेक्टिविटी और ब्राडबैंड सेवाओं के महत्व को रेखांकित किया है। देश के हर कोने में नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है, लेकिन इसलिए दूरदराज के इलाकों में उपग्रह कनेक्टिविटी आवश्यक है। इसके लिए स्थानीय आपूर्ति सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता है। मेक इन इंडिया कम प्रौद्योगिकी वाले सामान के आयात को प्रतिस्थापन को प्रोत्साहित करने सहित इनके संचालक काफी मददगार होगा। उच्च मात्रा वाले सेमीकंडक्टर चिप निर्माण आर्थिक विकास में अहम एवं भारत को रणनीतिक रूप से मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। आइआइटी मंडी के निदेशक प्रो. अजीत के चतुर्वेदी, बनमाली अग्रवाल प्रधान इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस एंड एयरोस्पेस एंड ग्लोबल कारपोरेट अफेयर्स टाटा सन्स व सौरभ गौड संयुक्त सचिव इलेक्ट्रानिक्स भारत सरकार भी संगोष्ठी से जुड़े। संगोष्ठी का आयोजन विशेष रूप से उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, केंद्र, राज्य सरकार के नीति निर्माताओं, अकादमिक इंजीनियरों, विज्ञानियों व पीएचडी कर रहे विज्ञान और इंजीनियरिग के छात्रों और संकाय सदस्यों के लिए डिजाइन किया गया। संगोष्ठी का समापन 16 नवंबर को होगा। संगोष्ठी के मुख्य विषय

भारत में फैब, वर्तमान और भविष्य

अत्यधिक पराबैंगनी 13.5 एनएम प्रौद्योगिकी

डिवाइस फैब्रिकेशन 28 एनएम और लोअर नोड्स

65,45,32 एनएम पैटर्निंग और डिवाइस फैब प्रौद्योगिकी मुख्य वक्ता

प्रो. बर्न लिन, राष्ट्रीय ताइवान विश्वविद्यालय ताइवान

डा. राल्फ डैममेल, मुख्य प्रौद्योगिकी ईएमडी मर्क यूएसए

प्रो. जिन्हो अहन निदेशक, ईयूवीआइयूसीसी कोरिया

डा. पैट्रिक नाउलेउ, निदेशक सीएक्सआरओ एलबीएनएल, बर्कले यूएसए

डा. इंदिरा पी शेषाद्रि आइबीएम, न्यूयार्क

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