IIT मंडी के स्टाफ से करोड़ों की ठगी: 15 लाख स्पांसरशिप देकर बढ़ाई निदेशक से नजदीकी और फिर ऐंठ ली कइयों की कमाई
गौरव अनिल धोते ने आईआईटी मंडी और उसके शीर्ष अधिकारियों की साख का इस्तेमाल कर ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी की।

आईआईटी मंडी के स्टाफ से करोड़ों की ठगी हुई है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
गौरव धोते ने आईआईटी मंडी की साख का दुरुपयोग कर ठगी की।
निदेशक से नजदीकी बनाकर प्रोफेसरों, कर्मचारियों से करोड़ों रुपये ऐंठे।
फर्जी कंपनियों के जरिए निवेश करवाकर आरोपी गौरव धोते नेपाल भागा।
हंसराज सैनी, मंडी। ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के आरोपित गौरव अनिल धोते ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मंडी व इसके शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की साख का इस्तेमाल कर बड़ा जाल बुना था। अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में 15 लाख रुपये की स्पांसरशिप देकर अनिल ने संस्थान के निदेशक के साथ नजदीकी बनाई व परिसर के प्रोफेसरों, कर्मचारियों व स्थानीय कारोबारियों का विश्वास जीतकर करोड़ों रुपये ऐंठ लिए।
महाराष्ट्र निवासी आरोपित गौरव अनिल धोते का संपर्क आइआइटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा से उस समय हुआ था, जब वह आइआइटी कानपुर में कार्यरत थे। इसी परिचय का लाभ उठाकर आरोपित ने मंडी में अपनी पकड़ बनाई।
खोल रखी थीं फर्जी कंपनी
लोगों का भरोसा जीतने के लिए उसने सेराफिना नाम से कई फर्जी कंपनियां खोल रखी थीं। वह निवेशकों को चमचमाते कार्यालय व फर्जी दस्तावेज दिखाकर हर माह पांच से 10 प्रतिशत ब्याज और तीन साल में पैसा दोगुना करने का झांसा देता था। उसने कमांद में कार्यालय खोल रखा था।
आरोपित को निदेशक के साथ कई बार मंच साझा करते देखा गया। तीन माह तक वह आइआइटी के गेस्ट हाउस में रहा। संस्थान के शीर्ष अधिकारी से नजदीकी देखकर लोगों व फैकल्टी ने उस पर भरोसा कर भारी निवेश किया।
40 करोड़ रुपये के पार पहुंच सकता है ठगी का आंकड़ा
पद्धर पुलिस के पास अभी तक सवा चार करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की शिकायतें आ चुकी हैं। आशंका जताई जा रही है कि कुल आंकड़ा 40 करोड़ रुपये के पार जा सकता है। अनिल इससे पहले कानपुर व गोवा में भी इसी तरह आनलाइन ट्रेडिंग के जरिए ठगी कर चुका है। मामला बढ़ने पर निदेशक ने इस वर्ष जुलाई में पीड़ितों को पैसा वापस दिलाने का वादा किया था, लेकिन आरोपित नेपाल भाग गया।
आइआइटी ने गौरव धोते मामले से साधी दूरी
आइआइटी ने आरोपित गौरव अनिल धोते व अन्य से जुड़े कथित निवेश घोटाले पर स्थिति स्पष्ट की है। संस्थान के रजिस्ट्रार कुमार एस पांडे ने बताया कि इन वित्तीय गतिविधियों का संस्थान से कोई संबंध नहीं है। धोते ने केवल स्टार्टअप इनक्यूबेशन सहायता के लिए संपर्क किया था, जिस पर सामान्य मार्गदर्शन दिया गया था। संस्थान ने किसी को धन जुटाने के लिए अधिकृत नहीं किया है। पुलिस जांच में पूर्ण सहयोग दिया जा रहा है।
