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IIT मंडी के दीक्षा समारोह में वयून गोयल को मिला प्रेजिडेंट गोल्ड मेडल, 643 छात्रों को डिग्री

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 20 Jun 2026 03:10 PM (IST)Updated: Sat, 20 Jun 2026 03:29 PM (IST)

आईआईटी मंडी के 14वें दीक्षा समारोह में 643 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिसमें व्यून गोयल को प्रेजिडेंट ऑफ ...और पढ़ें

आईआईटी मंडी के दीक्षा समारोह में उपस्थित विद्यार्थी। जागरण

आईआईटी मंडी के दीक्षा समारोह में उपस्थित विद्यार्थी। जागरण

HighLights

  1. आईआईटी मंडी में 14वें दीक्षा समारोह का आयोजन।

  2. व्यून गोयल को प्रेजिडेंट ऑफ इंडिया गोल्ड मेडल मिला।

  3. 643 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों में डिग्रियां प्रदान की गईं।

जागरण संवाददाता, मंडी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में शनिवार को 14वें दीक्षा समारोह में 643 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। इनमें पीएचडी 60, एमए 13, बीटेक 321, एमटेक 77, एमएससी 76, एमबीए के 45 विद्यार्थी सहित अन्य शामिल थे। इनमें वयून गोयल को प्रेजिडेंट ऑफ इंडिया गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया है। वयून ने कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक की है। वयून को इंटरनेशनल कंपनी में बड़ा पैकेज मिला है। सुखवंश जैन को निदेशक स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि बीके गोयनका वेलस्पन कंपनी के चेयरमैन ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया।

IIT MAndi Topper

आईआईटी मंडी के प्रेजिडेंट गोल्ड मेडलिस्ट वयून गोयल स्वजन के साथ। जागरण

जीवन में सफलता और असफलता महत्वपूर्ण नहीं

इस मौके पर संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक लक्ष्मी धर बेहरा ने छात्रों को विज्ञान, तकनीक और भारतीय संस्कृति के अद्भुत समन्वय के साथ जीवन में आगे बढ़ने का मंत्र दिया। उन्होंने कहा भगवद गीता के उपनिषदों के संदेश से शुरुआत की, कहा कि उच्च शिखर तक हमेशा एक-एक कदम बढ़ाकर ही पहुंचा जाता है। "जीवन में सफलता और असफलता महत्वपूर्ण नहीं हैं। सफलता से हमें समाज को और अधिक वापस लौटाने की प्रेरणा मिलती है, और असफलता से हम सीखते हैं कि कैसे खुद को बेहतर बनाया जाए।

ज्ञान विरासत में नहीं मिलता

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर योग को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि योग का अर्थ व्यक्तिगत चेतना को ब्रह्मांडीय चेतना से जोड़ना है। उन्होंने कहा की सीखना कभी बंद न करें। ज्ञान विरासत में नहीं मिलता, बल्कि इसे जिज्ञासा और अज्ञात में कदम रखने के साहस से अर्जित किया जाता है।

सीमा से परे जाकर जोखिम उठाने वाले रचते हैं इतिहास

विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में हुई महान खोजों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जो स्थापित सीमाओं से परे जाकर जोखिम उठाते हैं, इतिहास वही रचते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक और छात्र एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और बिना एक-दूसरे के दोनों का कोई अस्तित्व नहीं है। छात्र अपने साथ हिमालय की तलहटी में बसे इस क्षेत्र का लचीलापन और उपनिषदों की स्पष्टता लेकर बाहरी दुनिया में जाएं।

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