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'तिरपाल के नीचे तप रहा बचपन', हिमाचल के सरकारी स्कूल का हाल; अव्यवस्था से आहत अभिभावक धरने पर बैठे

By Kulbhushan VermaEdited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 18 Jun 2026 02:37 PM (IST)

हिमाचल के मंडी जिले में खडून प्राथमिक पाठशाला का भवन जर्जर होने के कारण बच्चे तिरपाल के नीचे पढ़ने को ...और पढ़ें

करसोग के खडून स्कूल में तिरपाल के नीचे पढ़ने बैठे बच्चे व धरना देते अभिभावक। जागरण

करसोग के खडून स्कूल में तिरपाल के नीचे पढ़ने बैठे बच्चे व धरना देते अभिभावक। जागरण

HighLights

  1. जर्जर स्कूल भवन के कारण बच्चे तिरपाल के नीचे पढ़ रहे।

  2. अभिभावक बच्चों की सुरक्षा और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे।

  3. प्रशासन की अनदेखी से लोगों में भारी आक्रोश, धरने पर बैठे।

कुलभूषण वर्मा, करसोग (मंडी)। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूल के बच्चे जून की गर्मी में तिरपाल के नीचे तप रहे हैं। जिला मंडी के करसोग उपमंडल में बेलरधार पंचायत के अंतर्गत प्राथमिक पाठशाला खडून में अव्यवस्था से आहत पेरेंट्स धरने पर बैठ गए हैं। दरअसल, स्कूल भवन बेहद जर्जर हालत में है। यहां हर पल किसी हादसे का भय रहता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए स्कूल परिसर में तिरपाल लगाकर अस्थायी रूप से कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।

अभिभावकों का स्पष्ट कहना है कि जब तक स्कूल भवन को सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता अथवा वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं करवाई जाती, तब तक किसी भी बच्चे को भवन के भीतर नहीं भेजा जाएगा। उनका आरोप है कि स्कूल भवन की छत लगातार टूटकर गिर रही है तथा पिलरों और बीमों में पड़ी दरारें किसी बड़े हादसे की आशंका को बढ़ा रही हैं।

प्रधानाचार्य ने की बात

वीरवार को स्कूल का जायजा लेने के लिए कॉम्प्लेक्स स्कूल शोरशन के प्रधानाचार्य भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने अभिभावकों से बातचीत कर स्थिति का निरीक्षण किया। हालांकि अभिभावकों का कहना है कि अभी तक प्रशासन या शिक्षा विभाग का कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।

लोगों में बढ़ा आक्रोश

ग्रामीणों का आरोप है कि मीडिया में मामला उजागर होने के बावजूद सरकार और प्रशासन की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उनका कहना है कि यदि किसी अनहोनी के बाद कार्रवाई होती है तो उसका कोई औचित्य नहीं रहेगा।

अभिभावकों ने कहा कि उनका उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई रोकना नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाना है। इसी कारण बच्चों को भवन के बाहर तिरपाल के नीचे बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, ताकि शिक्षा भी जारी रहे और बच्चों की सुरक्षा भी बनी रहे।

क्या हैं अभिभावकों की मुख्य मांगें?

  • स्कूल भवन का तत्काल तकनीकी निरीक्षण करवाया जाए।
  • भवन को सुरक्षित अथवा असुरक्षित घोषित करने की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
  • बच्चों के लिए तुरंत वैकल्पिक भवन की व्यवस्था की जाए।
  • जर्जर भवन की मरम्मत अथवा नए भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए।
  • जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मौके का दौरा कर समाधान सुनिश्चित किया जाए।

“बच्चों की जान जोखिम में नहीं डालेंगे”

अभिभावकों ने दो टूक कहा है कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी कीमत पर समझौते का विषय नहीं हो सकती। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द समस्या का समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर धरना-प्रदर्शन, चक्का जाम तथा बड़े स्तर पर जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।

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