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हिमाचल पंचायत चुनाव: जुड़वा भाइयों की पत्नियों में चुनावी जंग, बराबर रहे वोट तो पर्ची से हुआ फैसला

By Pushap Raj Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sun, 31 May 2026 06:04 PM (IST)

मंडी जिले की बैरी पंचायत में जुड़वा भाइयों की पत्नियों के बीच वार्ड सदस्य चुनाव में रोमांचक मुकाबला हुआ। दोनों ...और पढ़ें

जुड़वा भाइयों की पत्नियां नीलम देवी और अनीता देवी।

जुड़वा भाइयों की पत्नियां नीलम देवी और अनीता देवी।

HighLights

  1. मंडी की बैरी पंचायत में अनोखा चुनावी मुकाबला।

  2. जुड़वा भाइयों की पत्नियों को मिले बराबर वोट।

  3. पर्ची सिस्टम से नीलम देवी बनीं वार्ड सदस्य।

दिनेश ठाकुर, संधोल (मंडी)। हिमाचल पंचायत चुनाव में रिश्तों की मिठास और लोकतंत्र के रोमांच का एक ऐसा अनोखा संगम मंडी जिले में देखने को मिला, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। धर्मपुर उपमंडल की बैरी पंचायत के वार्ड चार (निचली बैरी) में वार्ड सदस्य के चुनाव के लिए जुड़वा भाइयों की पत्नियां आमने-सामने थीं। मुकाबला इस कदर कांटे का रहा कि जीत-हार का फैसला मतपेटियों से नहीं, बल्कि भाग्य की एक पर्ची से तय हुआ।

सगे भाइयों के आंगन में लोकतंत्र का दंगल

निचली बैरी के रहने वाले जुड़वा भाइयों, बलबीर सिंह और रणधीर सिंह के परिवारों के बीच यह दिलचस्प चुनावी मुकाबला था। बलबीर सिंह की पत्नी अनीता देवी और उनके जुड़वा भाई रणधीर सिंह की पत्नी नीलम देवी ने एक ही वार्ड से दांव खेला था। देवरानी और जेठानी के इस मुकाबले ने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। दिलचस्प बात यह रही कि इस राजनीतिक जंग में भी रिश्तों की डोर कमजोर नहीं पड़ी। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों परिवारों में गजब का सौहार्द देखने को मिला और किसी भी मोड़ पर कोई कटुता नहीं आई।

जब मतपेटी से ज्यादा भारी पड़ा भाग्य का खेल

मतदान संपन्न होने के बाद जब मतगणना की बारी आई, तो सामने आए नतीजों ने चुनाव अधिकारियों और ग्रामीणों की सांसें थाम दीं। मतदाताओं ने दोनों ही बहुओं पर बराबर प्यार बरसाया था।  अनीता देवी जेठानी को  51 वोट व नीलम देवी देवरानी को 51 वोट मिले।  मत बराबर होने की स्थिति में चुनाव अधिकारियों ने दोनों प्रत्याशियों की मौजूदगी में पर्ची सिस्टम अपनाने का फैसला किया। 

भाग्य के इस खेल में किस्मत ने रणधीर सिंह की पत्नी नीलम देवी का साथ दिया। जैसे ही अधिकारी ने पर्ची उठाई, उसमें नीलम देवी का नाम निकला और उन्हें वार्ड चार से निर्वाचित घोषित कर दिया गया। अनीता देवी मतों से नहीं, बल्कि सिर्फ भाग्य के फैसले से पीछे रह गईं। जुड़वा भाइयों के आंगन से निकला यह अनोखा चुनावी किस्सा अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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