संवाद सहयोगी, मंडी : ..मुख्यमंत्री साहब, प्रदेश में देवी-देवताओं से जुड़े मसलों को निपटाने के लिए कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए। प्रदेश में हजारों देवी देवता ऐसे हैं जिनके मंदिर सरकारी जमीन पर निर्मित हैं। लिहाजा इस जमीन को देवी-देवताओं के नाम किया जाए। शिवरात्रि मेले को भले ही अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेला कहा जाता है लेकिन दस्तावेजों में अभी इस मेले को राज्य स्तरीय दर्जा हासिल है। इस मेले का दर्जा राज्य स्तरीय से बढ़ाकर अंतरराष्ट्रीय किया जाए।

वीरवार को शिमला में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से सर्व देवता सेवा समिति के अध्यक्ष पंडित शिवपाल शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल मिला।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि शिवरात्रि की जलेब में शिरकत करने से पहले देवी-देवताओं व देवलुओं को माधोराय के मंदिर के बाहर खड़े होने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। देवी देवताओं समेत देवलुओं को माधोराय मंदिर में असुविधा न हो, इसके लिए भव्य मंदिर बनाया जाए। वर्तमान में माधोराय एक कमरे में विराजमान हैं। शिवरात्रि के दौरान निकलने वाली जलेब की अगुआई माधोराय करते हैं। देवसदन व संस्कृति सदन के निर्माण कार्य को गति देने के लिए राशि जारी की जाए।

मंदिरों में दुर्लभ मूर्तियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने जरूरी है। प्रदेश सरकार को इसका खर्च वहन करना चाहिए। ताकि चोरी आदि की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। मुजारा कानून में देवताओं की गई जमीन को वापिस दिया जाए। अगर सरकार इस तरह का निर्णय लेती है तो देवता प्रबंधन कमेटियां गो सदन का संचालन भी करेगी। कारदारों ने यह भी मांग रखी कि देवता की सराय के लिए जो पैसा सरकार के द्वारा पंचायत को दिया जाता है उसे देवता कमेटी के खाते में डाला जाए।

Posted By: Jagran

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