मंडी, जेएनएन। अंतरराष्‍ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्‍सव के लिए मंडी जनपद के आराध्य देव कमरुनाग वीरवार को छोटी काशी मंडी पहुंच गए। अपने मूल स्थान से करीब 100 किलोमीटर पैदल यात्रा करने के बाद देव कमरुनाग और उनके देवलू मंडी जिला मुख्यालय पहुंचे। मंडी जिला मुख्यालय पहुंचने से पहले पुलघराट पर प्रशासन की तरफ से देव कमरुनाग का भव्य स्वागत किया गया।

इसके बाद देव कमरुनाग ढोल नगाड़ों की थाप के साथ राज देवता माधोराय मंदिर पहुंचे। यहां पर उपायुक्त मंडी ऋग्वेद ठाकुर पहले से उनके स्वागत में खड़े थे। उपायुक्त ने देव कमरुनाग की छड़ी को हार पहनाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद देव कमरूनाग की छड़ी को राज माधोराय मंदिर ले जाया गया, जहां पर उनकी पूरे विधि विधान के साथ पूजा हुई। इसके बाद देव कमरुनाग राज परिवार से मिलने गए और वहां भी राज परिवार के सदस्यों ने देवता का स्वागत और पूजा अर्चना की। इसके बाद देव कमरुनाग टारना मंदिर पहुंचे।

बम-बम भोले के गूंजेगे जयघोष

महाशिवरात्रि पर्व पर छोटी काशी स्थित पौराणिक शिव मंदिर में हजारों शिव भक्त पूजा-अर्चना करते हैं। हजारों श्रद्धालु बम-बम भोले के जयकारे लगाकर महाशिवरात्रि पर्व आते हैं। सर्वत्र ओम की गूंज से नगर का वातावरण शिवमय हो जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त इस दिन पूरे श्रद्धा भाव और सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ के इस पौराणिक मंदिर में पहुंचकर उन्हें यादकर पूजन करता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है। इसी भावना को संजोये हजारों शिव भक्त भगवान शिव के जलाभिषेक को आकर अपनी मनौती पूर्ण करते हैं।

इन साम्रगी का किया जाता है उपयोग

महाशिवरात्रि पर्व पर व्रत की सामग्री--महाशिव रात्रि पर पूजन सामग्री में जिन वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है उसमें पंचामूल (गंगाजल, दूध, दही, घी, सहद, चीनी) सुगन्धित फूल, शुद्ध वस्त्र, भस्म, भांग, धतूरा, वेलपत्र, धूप, दीप, नैवेद्य, चंदन का लेप और ऋतु फल। महाशिव रात्रि व्रत की विधि--महाशिव रात्रि व्रत को रखने वालों को उपवास के पूरे दिन भगवान भोलेनाथ का ध्यान रखना चाहिए। प्रात: स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण की जाती है।

Posted By: Rajesh Sharma

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