आशीष भोज, पद्धर

चौहारघाटी के प्रमुख देवता देवाधिदेव हुरंग नारायण और घाटी के बजीर नाम से विख्यात अराध्य देव पशाकोट आजकल घाटी के भ्रमण पर हैं। गांव-गांव में दोनों देवता और साथ आए कारदारों का भव्य स्वागत किया जा रहा है। बुधवार को दोनों देवता अपने कारदार और लाव लश्कर के साथ थलटूखोड़ पहुंचे। यहां दोनों देवता के गुरों ने देवखेल के बाद ग्रामीणों को सुख समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद दिया। इस दौरान सबल ¨सह के घर देव जातर के भी आयोजन किया गया।

चौहारघाटी के महामहिम देवाधिदेव हुरंग नारायण और बजीर नाम से विख्यात अराध्य देव पशाकोट ग्रामीणों के लिए सरकार तंत्र और न्यायालय से भी सर्वोपरि हैं। घाटी के लोग किसी भी प्रकार के वाद विवाद, लड़ाई-झगड़े और चोरी आदि के मसलों को लेकर न्यायालय नहीं बल्कि देव अदालत में हाजिरी लगाते हैं। लोगों को न्याय देवता के माध्यम से मिलता है और आरोपी को देव प्रकोप का दंड भी भुगतना पड़ता है। यही नहीं देवता के समक्ष अपने किए का पाश्चाताप और माफी मांगने पर दोनों पक्षों में समझौता भी किया जाता है। जो लोग देवता के आदेशों की अवहेलना करने की कोशिश या अपनी मनमानी करने की सोचता है, उसकी सजा आरोपी के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों और अगले वंश को भी भुगतनी पड़ती है। इसी डर से चौहारघाटी में अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा अपराध भी कम संख्या में होते हैं। इसके अलावा भी देव हुरंग नारायण मूल मंदिर हुरंग और देव पशाकोट मंदिर नालदेहरा में हर रोज श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। आजकल घाटी के भ्रमण दौरान देव हुरंग नारायण के ज्येष्ठ गुर राजू राम, भागी राम, पुजारी ईश्वर दास, नड़ गुड्डू राम, देव पशाकोट के गुर नरोत्तम ¨सह, प्रेम ¨सह और पुजारी कृष्ण मौजूद हैं।

Posted By: Jagran

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