संवाद सहयोगी, कुल्लू : वैश्विक कोरोना महामारी के कारण साल 2020 से ही आर्थिक नुकसान झेल रहे कुल्लू जिला टैक्सी ऑपरेटर्स के लिए अब कोरोना की दूसरी लहर कहर बनकर टूटी है। एक साल से नुकसान झेल रहे टैक्सी ऑपरेटर्स का कारोबार पटरी पर लौटने से पहले ही एक बार फिर से लुढ़क गया है। जिला कुल्लू में अब पर्यटकों की आमद भी धीरे कम होने लगी है, जिस कारण टैक्सी ऑपरेटरों को बुकिग नहीं मिल रही है। गाड़ियों के इंश्योरेंस रिन्यू न होने से अधिकतर टैक्सी चालकों की गाड़ियां घरों में ही खड़ी हैं। टैक्सी ऑपरेटरों ने सरकार से टोकन टैक्स में राहत की मांग की है।

प्रदेश टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष मकरध्वज शर्मा व महासचिव जगदीश शर्मा ने बताया कि कई टैक्सी ऑपरेटर्स गत वर्ष से ही बैंक की किस्तें भी नहीं भर पाए हैं। ऐसे में टैक्सी ऑपरेटर्स को चिंता है कि मजबूरन टैक्सियों को बेचकर बैंक का कर्ज चुकाना होगा। परिवार के भरण-पोषण के लिए कोई और रास्ता तलाश करना होगा।

जिला कुल्लू में टैक्सी ऑपरेटर्स का कारोबार पर्यटन पर निर्भर रहता है। पर्यटक जब जिला का रुख करते हैं तो यहां पर पर्यटन स्थलों का रुख करने के लिए वह टैक्सी का ही सहारा लेते हैं जिससे यहां के हजारों टैक्सी ऑपरेटरों की रोजी-रोटी चलती है। इस साल फिर से कोरोना के कारण हालात जस के तस हैं। नुकसान से राहत पाने के लिए टैक्सी ऑपरेटर्स सरकार को कई बार पत्र भेजे चुके हैं लेकिन उन्हें मात्र 400 रुपये टोकन टैक्स की ही राहत दी है। प्रदेश टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष मकरध्वज शर्मा व महासचिव जगदीश शर्मा ने बताया कि सरकार के साथ उनकी वार्ता लगातार जारी है, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया है।

जिला टैक्सी ऑपरेटर्स यूनियन के अनुसार उत्तराखंड की सरकार ने टैक्सी ऑपरेटर का दो सालों के लिए टोकन व पैसेंजर टैक्स माफ किया है, जिससे उन्हें राहत मिली है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने नेशनल परमिट में टैक्सी की एक साल की राशि 25 हजार जबकि बड़ी गाड़ियों के लिए 75 हजार किया है जोकि एकमुश्त भरनी होगी, जिससे टैक्सी ऑपरेटरों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।

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