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हिमाचल के सैंज में बादल फटने से तबाही, मिनटों में बह गए रास्ते और पेयजल योजनाएं; कटे गांवों के संपर्क मार्ग

Published: Fri, 18 Sep 2026 11:26 AM (IST)

हिमाचल के सैंज स्थित नूहड़ा वाटरफॉल क्षेत्र में बादल फटने से भारी तबाही हुई है, जिससे छह पुलियाएं, पैदल रास्ते ...और पढ़ें

हिमाचल के सैंज में बादल फटने से तबाही।

हिमाचल के सैंज में बादल फटने से तबाही।

HighLights

  1. नूहड़ा वाटरफॉल में बादल फटने से भारी तबाही

  2. छह पुलियाएं बहीं, पेयजल लाइनें टूटीं, रास्ते क्षतिग्रस्त

  3. प्रधान ने प्रशासन से जल्द बहाली की मांग की

झावे राम ठाकुर, कुल्लू। सुचैहण पंचायत के नूहड़ा वाटरफॉल क्षेत्र में शुक्रवार को बादल फटने से भारी तबाही मच गई। अचानक तेज बारिश के बाद आए बाढ़ के पानी और मलबे ने क्षेत्र में कई जगहों पर नुकसान पहुंचाया।

तेज बहाव की चपेट में आने से करीब छह पुलियाएं बह गईं, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। वहीं गांवों को जोड़ने वाले पैदल रास्ते भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बाढ़ के पानी ने क्षेत्र की कई पेयजल योजनाओं की पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंचाया है।

पाइपलाइन टूटने से आने वाले दिनों में ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट खड़ा होने की आशंका है। स्थानीय लोगों के अनुसार, अचानक आए तेज बहाव के कारण उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला।

क्षेत्र में जगह-जगह रास्ते हुए प्रभावित, टूटा संपर्क

पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा आने से क्षेत्र में जगह-जगह रास्ते और संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं। बादल फटने के बाद नूहड़ा वाटरफॉल का प्राकृतिक स्वरूप भी बदल गया है। तेज बहाव के कारण वाटरफॉल क्षेत्र में बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया है। घटना के बाद प्रभावित क्षेत्र में ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल बनी हुई है।

खासकर पैदल रास्ते और पुलियाएं बहने से आसपास के गांवों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुचैहण पंचायत के प्रधान धर्मपाल ठाकुर ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्र का जल्द निरीक्षण कर नुकसान का आकलन करने की मांग की है।

रास्तों के साथ पेयजल योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर बहाल:

उन्होंने कहा कि बादल फटने से पुलियाओं, पैदल रास्तों और पेयजल योजनाओं को काफी नुकसान हुआ है। प्रशासन को प्रभावित क्षेत्र में टीम भेजकर वास्तविक नुकसान का जायजा लेना चाहिए।

प्रधान ने मांग की कि क्षतिग्रस्त पुलियाओं और रास्तों के साथ पेयजल योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया जाए, ताकि ग्रामीणों को पेयजल और आवाजाही की समस्या से जल्द राहत मिल सके।

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