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15 साल, 116 लापता... 22 का आज तक कोई सुराग नहीं, कुल्लू की पार्वती घाटी से कहां गायब हो रहे लोग?

Published: Mon, 05 Oct 2026 11:38 AM (IST)

कुल्लू की पार्वती घाटी में पिछले 15 सालों में 116 पर्यटक लापता हुए हैं, जिनमें से 22 का आज तक ...और पढ़ें

अनजान पगडंडियां और नशा पर्यटन बन रहे सैलानियों का काल।

अनजान पगडंडियां और नशा पर्यटन बन रहे सैलानियों का काल।

HighLights

  1. पार्वती घाटी में 15 साल में 116 लापता, 22 बेसुराग

  2. पर्यटकों की आवाजाही का लेखा-जोखा न होना बड़ी चुनौती

  3. नशा पर्यटन, खतरनाक ट्रेकिंग मार्ग लापता होने के प्रमुख कारण

संवाद सहयोगी, कुल्लू। पार्वती घाटी की खूबसूरत वादियां पर्यटकों को जितना आकर्षित करती हैं, उतना ही यहां सुरक्षा का अभाव गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। वर्ष 2011 से अब तक घाटी के पहाड़ों में 116 लोग लापता हो चुके हैं। इनमें विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।

बचाव दलों ने 94 लोगों को तलाश लिया, लेकिन 22 लोगों का आज तक सुराग नहीं लग पाया है। यानी डेढ़ दशक में सामने आए लापता होने के मामलों का एक बड़ा हिस्सा अब भी अनसुलझा है।

पर्यटकों का नहीं कोई लेखा-जोखा

सबसे बड़ा संकट यह है कि ऊंचाई वाले अनेक मार्गों पर पर्यटकों की आवाजाही का कोई प्रभावी लेखा-जोखा नहीं है। पर्यटक किस रास्ते से गए, कब लौटे और किस दिशा में बढ़े, इसका पता लगाना कई बार बचाव दलों के लिए सबसे कठिन चुनौती बन जाता है।

कसोल घाटी साहसिक पर्यटन संचालक संघ के अध्यक्ष ढाले राम सुमन के अनुसार, सुराग नहीं मिलने से तलाश अभियान की शुरुआत ही कठिन हो जाती है। स्थानीय संचालकों ने प्रशासन से प्रमुख मार्गों पर पंजीकरण चौकियां और पर्यटक सूचना केंद्र स्थापित करने की मांग की है।

उनका कहना है कि स्थानीय मार्गदर्शकों को व्यवस्थित किया जाए तो पर्यटकों की सुरक्षा के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिल सकता है। वन विभाग प्रमुख संदीप शर्मा ने कहा कि मार्गों पर प्रवेश द्वार और निगरानी व्यवस्था विकसित करने की योजना बना रहा है, लेकिन गांवों की पगडंडियों से आने-जाने वालों पर नजर रखना अब भी बड़ी चुनौती है।

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नशा पर्यटन ने बढ़ाया खतरा

पुलिस ने पर्यटकों को अकेले ऊंचाई वाले मार्गों पर न जाने और वन विभाग से आवश्यक अनुमति लेने की सलाह दी है। नशा पर्यटन ने खतरा और बढ़ा दिया है। भांग के लिए बदनाम पार्वती घाटी में नशे की हालत में पर्यटक अनजान और जोखिम भरे रास्तों पर पहुंच जाते हैं।

नदी में गिरने वालों की तलाश तो कई बार असंभव जैसी हो जाती है। बचाव विशेषज्ञ छापे राम नेगी के अनुसार, पार्वती नदी में जो समा गया, उसका वापस मिलना बेहद कठिन है।

यह है ट्रेकिंग रूट

मणिकर्ण-खीरगंगा-पीन वैली, कसोल से मलाणा, मलाणा से चंद्रखणी, चंद्रखणी से नग्गर, कसोल से रशोल से मलाणा से चंद्रखणी, रूमसू होते हुए नग्गर, कसोल से बरशैनी-खीरगंगा, मानतलाई, बुनबुनी ट्रेक, यह कसोल से कालगा, बुनबुनी खीरगंगा से वापिस बरशैनी, कसोल-रूद्रनाग-खीरगंगा, ट्रैकिंग रूट शामिल है।

नहीं मिल पाए यह पर्यटक

सन 1992 से लेकर अब तक कुल्लू घाटी में लापता हुए विदेशियों में आस्ट्रेलिया के चार, इजराइल के तीन, अमेरिका के तीन, स्विटजरलैंड के दो, नीदरलैंड के दो, और आयरलैंड, इंग्लैंड, इटली, रूस, कनाडा व युगोस्लाविया का एक-एक पर्यटक शामिल है। पौलेंड के ब्रुनो, अक्षय सेठी सूची का आखिरी नाम है।