जागरण संवाददाता, कुल्लू : अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव कुल्लू के दौरान रथ मैदान में चार हजार महिलाओं ने एक साथ महानाटी डालकर स्वच्छता व पोषाहार का संदेश दिया। पारंपरिक वेशभूषा में सजी कुल्लू जिले की महिलाओं व युवतियों ने नाटी डाली। लगभग एक घंटे तक चले इस कार्यक्रम को दो भागों में बांटा गया था। इस नाटी का रिकॉर्ड इंडिया बुक ऑफ रिकॉ‌र्ड्स में दर्ज होगा, इसके लिए उनकी टीम भी मैदान में मौजूद रही।

शनिवार को आयोजित महानाटी में कैबिनेट मंत्री गोविद सिंह ठाकुर ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। नाटी के पहले भाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने स्वच्छता व पोषाहार के बारे में जागरूक करने के लिए बनाए गाने पर नाटी डाली। इसके बाद सभी महिलाओं ने एक साथ कुल्लू के स्थानीय गानों पर नाटी आरंभ की। ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ स्थानीय लोकगीतों पर जब नाटी शुरू हुई तो मंत्री गोविद ठाकुर भी खुद को रोक नहीं पाए और पत्नी सहित नाटी में भाग लिया। उनके साथ उपायुक्त डॉ. ऋचा वर्मा भी थीं। उन्होंने भी अन्य महिलाओं के साथ लगभग 15 से 20 मिनट तक ताल से ताल मिलाई।

मुख्य अतिथि ने महानाटी के लिए स्वच्छता व पोषाहार जैसी थीम रखने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को बधाई दी। विदेशों से आए पर्यटकों व शोधार्थियों ने भी इस नाटी को अपने कैमरों में रिकॉर्ड किया। जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र आर्य ने बताया कि महानाटी का आयोजन हर वर्ष किसी न किसी थीम पर किया जाता है और इस बार की थीम स्वच्छता व पोषाहार रही। वर्ष 2014 से लगातार हो रहा कार्यक्रम

महानाटी का आयोजन वर्ष 2014 में शुरू किया गया था। पहली बार इसमें 8000 महिलाओं ने भाग लिया था और इसे लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था। उसके अगले वर्ष 2015 में 9892 महिलाओं ने नाटी डालकर गिनीज बुक में रिकॉर्ड दर्ज करवाया था। उसके बाद से किसी न किसी थीम पर हर वर्ष नाटी का आयोजन दशहरा में किया जाता है। गत वर्ष हुए चुनावों में भी जागरूकता अभियान के तहत 4000 के करीब महिलाओं ने नाटी डाली थी। इसे इंडिया बुक आफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था। नाटी के बाद से बढ़ी पट्टू की मांग

कुल्लू जिला के पारंपरिक परिधान पट्टू (भेड़ों की ऊन की शॉल) को भूल चुकी युवा पीढ़ी को इसके लिए प्रोत्साहित करने में महानाटी की अहम भूमिका रही है। जब से जिले में नाटी हुई, उसके बाद से युवा पीढ़ी इसकी ओर आकर्षित हुई और अब कॉलेजों स्कूलों के कार्यक्रमों में भी इस पारंपरिक परिधान को तरजीह दी जाने लगी है। इससे हथकर्घा उद्योग को भी बढ़ावा मिला है।

Posted By: Jagran

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