जागरण संवाददाता, मनाली :

लाहुल की पट्टन घाटी में फागली उत्सव धूमधाम एवं श्रद्धा से मनाया जा रहा है। यह पर्व हालड़ा उत्सव के 15 दिन बाद मनाया जा रहा है। यह पर्व उत्तर भारत के मैदान भागों में मनाए जाने वाले लक्ष्मी पर्व का भी प्रतिरूप माना गया है। घाटी के युवा अपने बुजुर्गो से सुख व समृद्धि का आशीर्वाद लें रहे है। यह उत्सव लाहुल के पट्टन से शुरू होकर समस्त लाहुल में मनाया जाएगा। कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मार्कडेय, पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने लोगों को फागली पर्व की शुभकामनाएं दी। फागली उत्सव लाहुल घाटी में हर साल सर्दियों के दौरान चंद्रमास की प्रथम तिथि अमावस्या को मनाया जाता है।

मान्यता है कि सर्दियों में बर्फ अधिक पड़ती थी, लोग एक दूसरे से कट जाते थे। सर्दियों में राक्षस का आतंक अधिक बढ़ जाने से लोग घरों से बाहर नहीं निकलते थे। लोग इष्ट देवों से प्रार्थना करते थे कि सुरक्षित रहे तो चंद्रमास की प्रथम तिथि को एक दूसरे के हाल से अवगत होंगे और देवी देवताओं सहित बुजुर्गो से सुख व समृद्धि का आशीर्वाद लेंगे। परंपरा को निभाते हुए लाहुली तीज त्योहार फागली के दिन अपने इष्ट देवों से सुख स समृद्धि का आशीर्वाद लेंगे। घाटी में अलग अलग नाम से जाना जाता है यह पर्व

लाहुल के भिन्न-भिन्न घाटी के लोगों ने इस त्योहार को अलग नाम दिए हैं। जैसे कुंहन, कुस, फागली, लोसर तथा जुकारी आदि। आज फागली त्योहार के दिन सभी कनिष्ठ लोग अपने निकट संबंधियों, गांववासियों, बुजुर्गो तथा ज्येष्ठ लोगों को जातीय तथा आयुगत वरियता के मुताबिक आदर सम्मान, नमस्कार एवं श्रद्धा को अभिव्यक्त करने कि रस्म निभा रहे है। इस सभी प्रकिया को ढाल कहा जाता है। जो लोग इस दिन घर से बाहर है उन्हें इस उत्सव के बाद प्रथम मिलन पर ढाल करना आवश्यक होता है। अपने से ज्येष्ठ एवं बुजुर्ग व्यक्ति ढाल ग्रहण कर छोटे को आशीर्वाद देता है। फागली के दिन दीवार के कोने में बराजा स्थापित किया जाएगा। जिसमें राजा बलि राज, चांद, सूरज, स्थानीय देवता, लक्ष्मी, तथा स्वास्तिक आदि अंकित कर पूजा अर्चना की जाएगी।

Posted By: Jagran

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