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माता हिडिंबा के आगमन बिना नहीं होती कुल्लू दशहरा की शुरुआत, सैकड़ों देवलुओं संग निकली भव्य शोभायात्रा

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 20 Oct 2026 02:32 PM (IST)

कुल्लू घाटी की अधिष्ठात्री देवी माता हिडिंबा सैकड़ों कारकूनों व देवलुओं के साथ मनाली से कुल्लू दशहरा उत्सव के लिए ...और पढ़ें

HighLights

  1. माता हिडिंबा सैकड़ों देवलुओं संग कुल्लू दशहरा को रवाना।

  2. उनकी उपस्थिति के बिना दशहरा उत्सव शुरू नहीं होता।

  3. मनाली से कुल्लू तक पैदल यात्रा, भव्य शोभायात्रा।

जसवंत ठाकुर, मनाली। हिमाचल प्रदेश में कुल्लू घाटी की अधिष्ठात्री मां देवी हिडिंबा मंगलवार को सैकड़ों कारकूनों व देवलुओं के साथ दशहरे की शोभा बढ़ाने कुल्लू रवाना हुईं। माता हिडिंबा दशहरा उत्सव की प्राचीन देव परंपरा निभाएंगी। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव की प्राचीन देव परंपरा निभाने के लिए अधिष्ठात्री माता हिडिंबा मंगलवार को मनाली से कुल्लू के लिए रवाना हो गईं।

मनाली में निकली भव्य शोभायात्रा

माता हिडिंबा के कुल्लू रवाना होने से पहले मनाली स्थित मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। माता की यात्रा के दौरान दर्शन करने के लिए जगह-जगह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने माता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और प्रसाद भी वितरित किया।

माता हिडिंबा के आगमन पर ही होता है दशहरा उत्सव का आगाज

विश्व प्रसिद्ध कुल्लू दशहरे में माता हिडिंबा के आगमन को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता के बिना दशहरा उत्सव की शुरुआत नहीं होती। मान्यता है कि माता हिडिंबा कुल्लू घाटी की अधिष्ठात्री देवी हैं और वे दशहरा उत्सव की रक्षक भी हैं। जब तक डूंगरी मंदिर से माता हिडिंबा की पालकी ढालपुर नहीं पहुंचती, तब तक भगवान रघुनाथ जी की रथयात्रा शुरू नहीं होती। माता हिडिंबा के आगमन के बाद ही रथयात्रा की विधिवत शुरुआत होती है।

देव परंपरा का हिस्सा 

कुल्लू दशहरा हिमाचल प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों में शामिल है। इस आयोजन में देवी-देवताओं की भागीदारी और पारंपरिक रीति-रिवाजों का विशेष महत्व है। माता हिडिंबा का मनाली से कुल्लू पहुंचना इसी देव परंपरा का अहम हिस्सा माना जाता है। हर वर्ष श्रद्धालु माता की यात्रा और दशहरा उत्सव से जुड़ी रस्मों का इंतजार करते हैं।

पैदल पहुंचेंगे कुल्लू

माता हिडिंबा के पुजारी व कारदार रमन शर्मा और रघुवीर नेगी ने बताया कि माता हिडिंबा का रथ और उनके कारकून ढूंगरी मंदिर से वाद्ययंत्रों की धुन के साथ कुल्लू के लिए रवाना हुए। परंपरा के अनुसार, माता का काफिला पैदल चलकर शाम को कुल्लू के रामशिला हनुमान मंदिर पहुंचेगा और वहां रात्रि विश्राम होगा। 

रघुनाथ जी की छड़ी आएगी माता को लेने

भगवान रघुनाथ की छड़ी बुधवार सुबह माता हिडिंबा को लेने रामशिला आएगी और माता के कुल्लू पहुंचने पर ही आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव की शुरुआत होगी। माता हिडिंबा के गूर देवी चंद ने दशहरा उत्सव शांति पूर्वक संपन्न होने की बात कही।

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