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हिमालय में बाढ़ आने से पहले ही मिलेगा अलर्ट, भारत की पहली GLOF अर्ली वार्निंग सिस्टम की स्थापना; ISRO ने दी थी चेतावनी

Published: Thu, 15 Oct 2026 10:47 PM (IST)

लाहुल स्पीति की घेपन घाट हिमनद झील में भारत की पहली ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित की गई है।

घेपन घाट हिमनद झील में स्थापित हुई भारत की पहली जीएलओएफ प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली।

घेपन घाट हिमनद झील में स्थापित हुई भारत की पहली जीएलओएफ प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली।

HighLights

  1. घेपन घाट झील में भारत की पहली जीएलओएफ चेतावनी प्रणाली स्थापित

  2. हिमालयी क्षेत्र में आपदा जोखिम कम करने में सहायक होगी प्रणाली

  3. सी-डैक द्वारा विकसित, एनडीएमए द्वारा वित्तपोषित यह महत्वपूर्ण परियोजना

जागरण संवाददाता, केलंग। हिमालयी क्षेत्र में आपदा जोखिम को कम करने तथा प्रारंभिक चेतावनी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में लाहुल स्पीति प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। जिले की घेपन घाट हिमनद झील में भारत की पहली ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीओएलएफ) प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली ( अर्ली वार्निंग सिस्टम ) स्थापित की गई।

समुद्र तल से लगभग 4,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस झील में स्थापित यह प्रणाली सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग द्वारा विकसित की गई है। यह परियोजना राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा वित्तपोषित पायलट परियोजना का हिस्सा है।

घेपन घाट झील के बढ़ते आकार और इससे जुड़े संभावित जोखिमों को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा पहले से ही निगरानी एवं एहतियाती उपायों को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, और उपायुक्त एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण किरण भड़ाना लगातार अर्ली मॉर्निंग सिस्टम जल्दी स्थापित करने हेतु राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से संपर्क में थी ताकि झील के पानी के स्तर की वास्तविक स्थिति के आंकड़े लगातार जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को मिल सके और झील के पानी के स्तर की लगातार निगरानी रखी जा सके।

इस संदर्भ में हाल ही में किरण भड़ाना ने स्वयं घेपन झील का दौरा भी किया था। नवंबर 2023 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा झील के बढ़ते क्षेत्रफल के संबंध में प्रशासन को अवगत करवाया गया था। इसके बाद झील के संभावित जोखिमों के आकलन, वैज्ञानिक अध्ययन, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और आपदा से निपटने की तैयारियों को लेकर विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए गए। इसी क्रम में अब झील पर अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम की स्थापना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

वहीं दूसरी ओर, चंद्रा–चिनाब (चंद्रभागा) नदी क्षेत्र में उच्चतम बाढ़ स्तर के चिह्नांकन का कार्य 100 प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। ये जिले में वैज्ञानिक निगरानी, संभावित बाढ़ जोखिम के आकलन, जन-जागरूकता तथा प्रभावी आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

घेपन घाट झील में स्थापित प्रणाली में बुआय-आधारित झील निगरानी स्टेशन, स्वचालित मौसम स्टेशन तथा ग्लेशियर विजन यूनिट शामिल हैं। इन उपकरणों के माध्यम से झील और उसके आसपास के पर्यावरणीय परिवर्तनों की निगरानी की जाएगी। इस महत्वपूर्ण परियोजना के क्रियान्वयन में जिला प्रशासन और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने प्रशासनिक स्वीकृतियों, लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं तथा फील्ड स्तर पर समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण , अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान , राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल , चिकित्सा एवं पुलिस दलों तथा अन्य सहयोगी एजेंसियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, कठिन पहाड़ी भूभाग और अप्रत्याशित मौसम के बावजूद विभिन्न एजेंसियों और फील्ड टीमों के समन्वित प्रयासों से इस प्रणाली की स्थापना संभव हो पाई।