कुल्लू, मुकेश मेहरा। लंबी पूंछ, पीली गर्दन, नीला रंग व 27 से 29 सेंटीमीटर लंबाई वाला यूरोपियन बी-ईटर लाहुल की वादियों में मिला है। यह पक्षी दक्षिणी यूरोप और उत्तरी अफ्रीका में सबसे अधिक पाया जाता है। लाहुल में इसे पहली बार जून-जुलाई में देखा गया है। इसको वन विभाग में कार्यरत वन रक्षक शिव कुमार व उनकी टीम ने कैमरे में कैद किया।

शीत मरुस्थल पक्षियों की पंसदीदा जगह बनता जा रहा है। अब तक 148 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पक्षी यहां तक देखे गए हैं। अपने नाम के अनुरूप मधुमक्खी खाने वाले यूरोपियन बी-ईटर मैदान इलाकों में ही देखे जाते हैं। जून-जुलाई में इस बार यूरोपियन बी-ईटर लाहुल में देखे जाने के बाद इसकी रिपोर्ट वन विभाग को की गई।

प्रजनन के लिए ये पक्षी पहाड़ों की ओर जाते हैं। यूरोपियन बी-ईटर मधुर आवाज लगाता है और इसी के आधार पर इनके नर और मादा होने की पहचान होती है। मैदानी इलाकों में नदी किनारे ही पाए जाते हैं क्योंकि मधुमक्खी के अलावा ये कीट पतंगों को भी भोजन बनाते हैं। लाहुल में काम कर रहे वन रक्षक शिव कुमार, महेश, अश्वनी  कुमार व ट्विंकल भट्ट की टीम यहां पर पक्षियों और जानवरों की प्रजातियों की खोज के लिए कार्य करती है। इसके लिए सीसीटीवी कैमरा सहित अन्य सुविधाओं का सहारा लिया जाता है। इन्हीं में से ईशान राशपा, गुरु राणा और शिव कुमार को लाहुल में यूरोपियन बी-ईटर मिला था।

लाहुल-स्पीति पहुंचा यूरोपियन बी-ईटर पक्षी

हिमाचल में पहली बार जून-जुलाई में देखा गया था यह विदेशी पक्षी उत्तरी अमेरिका में पाया जाने वाला बहमियन वेक्सिंग भी मिला लाहुल-स्पीति में उत्तरी अमेरिका में पाया जाने वाला बहिमन वेक्सिंग नामक पक्षी भी पाया गया है। इसकी रिपोर्ट 2017 में की गई थी। यह पक्षी बेरी खाता है। इसे स्थानीय निवासी राज ने देखा था। यह भी बी-ईटर की तरह शीतस्थलों पर प्रजनन के लिए आता है। राज बताते हैं कि लगभग 100 साल के बाद ही इसे भारत में देखा गया है, लेकिन यह यहां कैसे पहुंचा इस बारे में जानकारी किसी को नहीं है। 

लाहुल में गिद्ध की चार प्रजातियां बेहतर कार्य के लिए सरकार द्वारा सर्वोत्तम वन्य जीव मित्र पुरस्कार से सम्मानित किए गए वनरक्षक शिव कुमार बताते हैं कि लाहुल में गिद्ध की अलग-अलग छह प्रजातियां हैं, इनमें से अभी तक चार देखी जा चुकी हैं। उनकी टीम ने ओरेंज बूल फिंच, बार हेडेड गीज, टफड डक, यूरोपियन रोलर, नॉर्थन शॉवर, ग्रेट क्रेसटेड ग्रेवे, सुलफुरे बेलीज को देखा है। यह कार्य चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट भूपेंद्र राणा के मार्गदर्शन से ही सफल हो पाया है।

 

Posted By: Babita kashyap

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस