कमलेश वर्मा, कुल्लू

बच्चे को घर पर अकेला छोड़कर लॉकडाउन में जिले के लोगों को चुनौतियों से बचाने के लिए उपायुक्त डा. ऋचा वर्मा की शक्ति उनके बेटे की मुस्कान बनी। वह जनता के प्रति कर्तव्य का पालन करने के साथ-साथ मां होने का फर्ज भी बखूबी निभा रही हैं। बकौल उपायुक्त, साल पहले जब लॉकडाउन लगा तो उस समय उनके परिवार का कोई भी सदस्य साथ नहीं था। मजबूरन ढाई साल के बेटे अजितेश को घर पर अकेला छोड़कर कार्यालय जाती थीं। कोरोनाकाल में उनका बेटा अजितेश उनके लिए हिम्मत बना। कार्यालय से जब थकी-हारी आती तो बेटे के मुस्कुराते हुए चेहरे को देखते ही सारी परेशानियों को भूल जाती। सारी चुनौतियां मानो बच्चे की मुस्कान के आगे छोटी पड़ जातीं।

अब फिर कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में लोगों को संक्रमण से बचाना उनकी पहली प्राथमिकता है। पिछले साल भी वह कोरोनाकाल में दिन-रात फॉलोअप के लिए जिलाभर के अधिकारियों के संपर्क में रहती थीं और अभी भी। उस दौरान क‌र्फ्यू चुनौतियों से भरा था, सबसे बड़ी चुनौती कुल्लू में फंसे हुए पर्यटकों और अन्य राज्यों में फंसे हुए कुल्लू के लोगों को घर वापस पहुंचाने की थी। क्वारंटाइन सेंटर की व्यवस्था कर अन्य राज्यों से आने वाले लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध करवाकर उनके सैंपल लेने की प्रक्रिया भी शुरू की। कुल्लू में फंसे हुए सभी लोगों को सकुशल अपने घर पहुंचाने के लिए कमान संभाली और अन्य राज्यों में फंसे लोगों की भी घर वापसी हुई। वहीं, अब कोरोना की दूसरी लहर में भी वह बेटे को घर पर छोड़कर जिले की चुनौतियों का सामना करने के लिए डटी हैं।

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घर और कर्तव्य के बीच बैठाया तालमेल

कोरोना के खिलाफ जंग में कुल्लू प्रशासन के कई अधिकारी दिन-रात मोर्चे पर डटे हैं। महिला अधिकारी भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने परिवार और कर्तव्य के बीच तालमेल बैठाकर फर्ज निभा रही हैं।

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