जागरण संवाददाता, केलंग : विपरीत परिस्थितियों में बेहतर काम करने का अनुभव रखने वाला सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) फिर कड़ी परीक्षा से गुजर रहा है। दिन रात काम पर जुटे बीआरओ के सहयोग से लाहुल घाटी में बाढ़ आने से अस्त-व्यस्त हुआ जनजीवन अब धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है। शांशा नाले के पानी को मोड़कर बीआरओ ने पुल का मरम्मत कार्य भी शुरू कर दिया है जबकि पैदल पुलिया बनाकर पैदल राहगीरों को भी राहत दी है।

शांशा में पैदल पुलिया बनने से किसानों को सबसे अधिक राहत मिली है। मटर व गोभी की फसल अब मंडियों में पहुंचने लगी है। जाहलमा नाले सहित शांशा से कीर्तिंग के बीच सब्जी की पेटियों को कंधे में उठाकर आगे भेजा जा रहा है।

उधर, कर्नल उमा शंकर कमांडर बीआरओ ने बताया कि बीआरओ के तांदी-किलाड़-संसारी मार्ग पर चार पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। जाहलमा में बीआरओ नए सिरे से पुल का निर्माण करेगा। मड़ग्रा में बाढ़ ने बीआरओ को भारी नुकसान पहुंचाया है। शांशा नाले का पानी मोड़कर पुल को बाहन योग्य बनाया जा रहा है। जाहलमा में भी नए पुल का कार्य शुरू है। थिरोट पुल की हालत सुधार ली है, जबकि मड़ग्रा पुल का कार्य भी प्रगति पर है।

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शांशा नाले में काम युद्धस्तर पर चल रहा है। अस्थायी पुल लगा दिया है। फूलगोभी की पेटियां कीर्तिंग पहुंचाई जा रही हैं। बीआरओ ने जाहलमा नाले को भी वाहन योग्य बनाने का काम जोरों से चलाया है। स्थानीय लोगों व महिला, युवक मंडलों का विशेष आभार जो दिन रात निस्वार्थ भाव से मदद को आगे आए हैं।

-डा. रामलाल मार्कंडेय, तकनीकी शिक्षा मंत्री।

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