संवाद सूत्र, पतलीकूहल : सेब को तैयार होने में मात्र 20 दिन बचे है, परंतु क्षेत्र में एकाएक सेब के पेड़ के पत्ते पीले पड़ने लगे हैं। तुड़ान से पहले पत्तों के पीले पड़ने से बागवान परेशान हो गए हैं। वाम मार्ग के लगभग सभी गांवों ब्लाइट और मार्सोनिना की चपेट में आ गए हैं। इनमें छाकी, सरसई, सजला, करजां, खकनाल, गोजरा, जगतसुख, अलेऊ व मनाली में यह बीमारी काफी फैल चुकी है। पत्ते के गिरने से सेब में रंग सही प्रकार से नहीं आता है।

बागवानी विभाग काफी कोशिशों के बावजूद अभी तक इस बीमारी की रोकथाम के उपाय नहीं कर सका है। यह बीमारी कुल्लू में 2017 के बाद काफी फैल रही है। अभी तक बागवानों को किसी भी फफूंदनाशक का छिड़काव करने से मार्सोनिना पर नियंत्रण नहीं मिल पाया है। अब यह बीमारी छाकी और सरसई से निकल कर पूरे क्षेत्र में तेजी से फैल रही है। अगर इसको जल्द न रोका गया तो बागवानों को तगड़ा आर्थिक झटका लग सकता है।

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क्या है मार्सोनिना

मार्सोनिना एक फफूंद होता है। इसकी शुरुआत पत्तों में काले व लाल धब्बे पड़ने से होती है तथा बाद में धीरे-धीरे पत्ता पीला पड़ने लगता है और पेड़ से गिर जाता है। पत्तों के गिरने से पेड़ भोजन बनाने में असमर्थ हो जाता है और सेब को नुकसान होना शुरू हो जाता है। इससे सेब में सही प्रकार रंग नहीं आता है और सेब की गुणवत्ता भी नहीं बन पाती है।

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क्षेत्र में अल्टरनेरिया, ब्लाइट और मार्सोनिना का हमला सेब पर हुआ है। इन बीमारियों की रोकथाम के लिए उद्यान विभाग काफी प्रयास कर रहा है परंतु उन्हें अभी तक सफलता हाथ नहीं लगी है। कुल्लू फलोत्पादक मंडल सरकार से आग्रह करता है कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए वैज्ञानिकों की विशेष टीम गठित की जाए और इस बीमारी पर काबू पाने के लिए शीघ्र कार्य किया जाना चाहिए। 2017 में आकस्मिक पतझड़ के कारण और 2018 में फसल के कम होने से पहले ही बागवान बैकफुट पर हैं।

-प्रेम शर्मा प्रधान, कुल्लू फलोत्पादक मंडल

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मामला मेरे ध्यान में है, इन बीमारियों के आने का मुख्य कारण समय पर स्प्रे न करना है। विभाग के स्प्रे सारिणी बनाई है और बागवानों को इसके आधार पर समय पर स्प्रे करनी चाहिए। अल्टरनेरिया और मार्सोनिना के आने के कारण आकस्मिक पतझड़ होती है और सही फफूंदनाशक का प्रयोग समय पर करने से इसकी रोकथाम हो सकती है। विभाग ने पौध संरक्षण केंद्रों में इसकी रोकथाम के लिए प्रोपिनेवभेज दी है और शीघ्र ही कैप्टान फफूंदनाशक को भी भेजा जाएगा। लोगों को जागरूक करने के लिए विभाग जागरूकता शिविरों का आयोजन भी करवा रहा है।

-राकेश गोयल, उपनिदेशक उद्यान विभाग कुल्लू।

Posted By: Jagran

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