कुल्लू, मुकेश मेहरा। एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर आइपीएस बनने के बाद कुल्लू की एसपी शालिनी अग्निहोत्री अब अपनी तरह और युवतियों को देश की सेवा के लिए तैयार कर रही हैं। जिला की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली पुलिस अधीक्षक ने अब बच्चों के भविष्य को संवारने की भी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई है। एक साल पहले शुरू किए 'मिशन सहभागिता आपकी और हमारी' के तहत पहले नशे पर प्रहार किया और अब मई में युवाओं को तराशना शुरू किया। 

एसपी रोज सुबह आठ से नौ बजे तक 66 बच्चों को यूपीएससी (यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन), एचपीपीएससी (हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन) की नि:शुल्क कोचिंग स्वयं दे रही हैं। साथ ही, बैंकिंग, हिमाचल एलाइड सर्विस के बारे में भी जानकारी मुहैया करवा रही हैं।

पुलिस अधीक्षक कुल्लू शालिनी अग्निहोत्री बच्चों को कोचिंग देते हुए।

सुबह ड्यूटी पर जाने से पहले शालिनी अग्निहोत्री ठीक आठ बजे ढालपुर स्कूल के हाल में पहुंच जाती हैं। यहां पर 66 बच्चे, जो कुल्लू और अन्य जगहों से यहां किराये पर रहते हैं, कोचिंग लेते हैं। मिशन सहभागिता के तहत शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट को आरंभ करने का विचार उनका ही है। उन्होंने इस मुहिम में अपने साथ अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी शामिल किया है। इस पूरे प्रोजेक्ट के समन्वयक बीजू बताते हैं कि जिला के बच्चों को यूपीएससी व एचपीपीएससी की परीक्षा की कोचिंग के लिए अन्य जिलों में ज्यादा फीस देकर जाना पड़ता था।

कई सामान्य परिवार के लोग इसे वहन नहीं कर सकते। इसी बात को देखते हुए एसपी शालिनी अग्निहोत्री ने मिशन सहभागिता के तहत कोचिंग कक्षाएं आरंभ करने के लिए योजना बनाई और खुद सुबह आठ बजे इन कक्षाओं में प्रशिक्षण देती हैं। इन कक्षाओं में भाग लेने के लिए विद्यार्थी को केवल एक फार्म भरना होता है, जो उनके पास उपलब्ध है।

 

पुलिस अधीक्षक कुल्लू शालिनी अग्निहोत्री।

बीडीओ कुल्लू भी दे रहीं कोचिंग
सहभागिता के इस कार्यक्रम में एसपी कुल्लू ने खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कुल्लू जयावंती को भी कोचिंग देने का आग्रह किया था। उनके आग्रह पर अब बीडीओ भी बच्चों को विभिन्न विषयों पर जानकारी मुहैया करवा रही हैं।

अब आनी में शुरू होंगी कक्षाएं
जिला के सबसे दूरस्थ क्षेत्र आनी व निरमंड के बच्चे, जो कोचिंग के लिए वहां से नहीं आ सकते, को यह सुविधा देने के लिए वहां पर ब्लॉक समन्वयक दीवान राज के जरिए इन कक्षाओं का संचालन किया जाएगा।

कोचिंग लेने में लड़कियां आगे
कोचिंग में सबसे अधिक युवतियां शामिल हो रही हैं। 66 विद्यार्थियों में से 44 लड़कियां हैं। बीजू बताते हैं कि इसके लिए जितने भी फार्म उनके पास आ रहे हैं उनमें युवतियों की संख्या ज्यादा है।

शिक्षक की तरह ब्लैक बोर्ड के सहारे दे रहीं ज्ञान
कक्षाओं में ब्लैक बोर्ड के सहारे बच्चों को पढ़ाया जाता है। हालांकि शुरुआत में पुलिस हाल में प्रोजेक्टर का इस्तेमाल हुआ था, लेकिन अब ढालपुर स्कूल में केवल ब्लैक बोर्ड पर ही समझाया जाता है। बच्चों को होमवर्क भी दिया जाता है।

खुद भी सामान्य परिवार से हैं एसपी
एसपी शालिनी अग्निहोत्री खुद भी सामान्य परिवार से संबंधित हैं। एसपी ने आम बच्चों की जरूरतों को समझते हुए नि:शुल्क कोचिंग शुरू की। शालिनी के पिता हिमाचल पथ परिवहन निगम से कंडक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। माता गृहिणी हैं। एसपी ने भी इस मुकाम को हासिल करने के लिए काफी मेहनत की है।
---
कई बार होनहार बच्चे कोचिंग के अभाव में यूपीएससी व एचपीपीएससी सहित अन्य परीक्षाओं में पिछड़ जाते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मिशन सहभागिता के तहत इन कोचिंग कक्षाओं को शुरू किया गया है। मैं स्वयं और अन्य अधिकारी भी इसमें सहयोग कर रहे हैं।
-शालिनी अग्निहोत्री, एसपी कुल्लू।

लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Sachin Mishra