धर्मशाला, राजेश शर्मा। साल 2019 खत्म होने जा रहा है। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में यह साल भाजपा और कांग्रेस के लिए काफी उतार-चढ़ाव लेकर आया। हालांकि सत्‍तारूढ़ दल भाजपा के लिए यह फायदेमंद रहा। मई में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने चारों सीटों जीतकर न केवल क्‍लीन स्‍वीप किया, बल्कि रिकॉर्ड जीत दर्ज कर दिग्‍गजों के आंकड़ों को भी पीछे छोड़ दिया। कांग्रेस के लिए यह चुनाव किसी सदमे की तरह रहा। पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा और कई दिग्‍गज चुनाव हार गए।

बात करें हार जीत के अंतर की तो कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी किशन कपूर को प्रदेश में सबसे अधिक 72.02 फीसद मत मिले। मत प्रतिशत के लिहाज से कपूर देशभर में दूसरे स्थान पर रहे। कांगड़ा से किशन कपूर को 725218 मत मिले, जबकि प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के पवन काजल 247595 पर ही सिमट गए। कपूर की जीत का अंतर 4,77,623 रहा। वोटों के मामले में किशन कपूर अपने राजनीतिक गुरु शांता कुमार से भी आगे निकल गए। अन्‍य सीटों पर भी भाजपा प्रत्‍याशियों की जीत का अंतर तीन लाख के करीब रहा, ऐसा अभी तक नहीं हुआ था। इस चुनाव में भाजपा ने जहां बढ़त का रिकॉर्ड बनाया तो कांग्रेस सबसे कम वोट मिलने का। भाजपा को 69.01 व कांग्रेस को 27.04 फीसद मत मिले।

धर्मशाला और पच्‍छाद उपचुनाव में भाजपा को जरूर संघर्ष करना पड़ा, लेकिन जीत दर्ज कर ली। कांग्रेस के लिए यहां भी शुभ संकेत नहीं मिले। हार हुई पर वह भी शर्मनाक। धर्मशाला में कांग्रेस प्रत्‍याशी जमानत तक नहीं बचा पाए। कांग्रेस में इस कदर उठापटक दिखी कि हाईकमान को पूरी कार्यकारिणी ही निरस्‍त करने का फैसला लेना पड़ गया। प्रदेश अध्‍यक्ष कुलदीप राठौर को छोड़कर सभी पदाधिकारियों को पदमुक्‍त कर दिया गया। भाजपा में भी नए प्रदेश अध्‍यक्ष को लेकर खींचतान जारी रही।

पूर्व मुख्‍यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता वीरभद्र सिंह का स्‍वास्‍थ्‍य भी खराब रहा। उधर, मंडी की राजनीति के नायक माने जाने वाले पूर्व केंद्रीय राज्‍यमंत्री पंडित सुखराम भी चर्चा में रहे। उन्‍होंने पोते को लोकसभा चुनाव में भाजपा से टिकट दिलाने के लिए खूब जदोजहद की। लेकिन ऐन मौके पर वह कांग्रेस का टिकट लेकर मंडी पहुंच गए।

बंजार और कुम्‍मारहट्टी हादसों ने झकझोरा

जिला कुल्‍लू के बंजार में जून माह में हुए सड़क हादसे में 47 लोगों की मौत हो गई। यह अब तक के बड़े हादसों में शामिल रहा। ओवरलोड निजी बस कई सौ फीट खाई में समा गई। 14 जुलाई को सोलन जिला के कुम्‍मारहटटी में लंच पर आए असम रायफल के जवानों पर मौत टूट पड़ी। चार मंजिला भवन तेज बारिश के बीच धंस गया। भवन में करीब 35 जवान लंच करने रुके थे। भवन के मलबे में करीब 30 लोग दब गए, जिनमें से असम रायफल के 12 जवानों समेत 1 स्‍थानीय महिला की मौत हो गई थी। इसके अलावा सालभर सड़क हादसों सैकड़ों लोगों ने जान गंवाई।

बरसात ने दिखाया रौद्र रूप

बरसात के मौसम ने हिमाचल ने रौद्र रूप दिखाया। कुल्‍लू में नेशनल हाईवे की सड़क समेत पुल बह गया। जिला मंडी में ब्‍यास के रौद्र रूप ने सभी घाट पानी में डूबा दिए। गाडि़यां खिलौनों की तरह ब्‍यास में समां गईं।

अंतरराष्‍ट्रीय कुल्‍लू दशहरा में देवधुन पर विवाद

अंतरराष्‍ट्रीय कुल्‍लू दशहरा में पहली बार देवधुन बजाने पर विवाद हो गया। सरकार व प्रशासन ने इसे नई पहल के तौर पर शुरू किया। लेकिन देव समाज ने इसे देवताओं का अपमान माना। दिन में और नेताओं के सामने देवधुन बजाने का देव संसद बुलाकर विरोध हुआ। इस विवाद के कारण पांच साल बाद रघुनाथ मंदिर में जगती का आयोजन हुआ।

बारिश में धुल गया मैच

अरसे बाद धर्मशाला क्रिकेट स्‍टेडियम को अंतरराष्‍ट्रीय मैच मिला। लेकिन भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच यह मुकाबला बारिश के कारण धुल गया। मैच से कुछ घंटे पहले बारिश शुरू हुई जो मैच रद होने की घोषणा तक जारी रही।

इन्‍वेस्‍टर्स मीट

धर्मशाला में 7 और 8 नवंबर को हुई इन्‍वेस्‍टर्स मीट में 635 निवेशकों ने 92 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा के एमओयू साइन किए। इन्‍वेस्‍टर्स मीट में 201 विदेशी अौर 2000 देश के निवेशकों ने भाग लिया। इसके अलावा 10 देशों के राजदूतों सहित 16 देशों सहित इन्वेस्टर मीट कंट्री पार्टनर यूएई के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने भाग लिया। इसमें प्रधानमंत्री मोदी समेत अन्‍य केंद्रीय मंत्री भी पहुंचे।

छात्रवृत्ति और आयुर्वेद घोटाला

हिमाचल प्रदेश में हुए 250 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में सीबीआइ ने कई संस्‍थानों में दबिश दी। मामला अब हाईकोर्ट में पहुंच गया है व सभी 2772 शिक्षण संस्‍थानों की पड़ताल की तैयारी है। दैनिक जागरण की ओर से उजागर किया गया आयुर्वेद विभाग का घोटाला भी प्रदेश में चर्चा में रहा। सरकार ने इसकी अब विजिलेंस जांच किए जाने की अनुमति दे दी है।

आइआइटी मंडी में शोध

आइआइटी मंडी में सालभर में तीस से ज्‍यादा शोध हुए, इनमें एयरक्रॉफ़ट की मरम्‍मत के लिए तैयार साफ़टवेयर प्रमुख रहा। भारत में पहली बार यह तकनीक इजाद हुई है। पहले हम विदेश पर निर्भर थे।

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Posted By: Rajesh Sharma

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