टांडा (कांगड़ा), जेएनएन। यहां गर्म पानी 10 रुपये में मिलता है। दूध गर्म करने के भी पैसे वसूले जाते हैं और चाय का कप भी 10 रुपये में दिया जाता है। जी हां, डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कांगड़ा स्थित टांडा की कैंटीन में मरीजों व उनके तीमारदारों को कुछ इस तरह की सहूलियतें दी जा रही हैं। हालांकि अस्पताल के अंदर कैंटीन खोलने का उद्देश्य मरीजों, तीमारदारों व डॉक्टरों को किफायती दाम पर खाद्य वस्तुएं मुहैया करवाना है, लेकिन जब गर्म पानी के भी पैसे वसूले जाएं तो समझा जा सकता है कि कैंटीन से कितनी मदद पीड़ित लोगों की हो रही है। मरीजों व तीमारदारों ने कैंटीन के कर्मचारियों के व्यवहार पर भी आपत्ति जताई है।

शाहपुर के राजकुमार ने बताया कि उनका मरीज सर्जरी वार्ड में दाखिल है। वह दूध गर्म करवाने कैंटीन गया था। दूध गर्म करने के पैसे तो लिए गए लेकिन कर्मचारी का व्यवहार भी ठीक नहीं था। वहीं, चंबा निवासी सु¨रद्र ने बताया कि उन्होंने कैंटीन से दूध खरीदा। जब बोतल में गर्म पानी देने की गुहार लगाई तो कर्मचारी ने साफ कहा पहले बिल कटवाकर लाओ। जब पूछा कि क्या पानी के भी पैसे वसूले जाते हैं तो कर्मचारी ने कहा सरकार को किराया देते हैं।

यहां हर चीज के पैसे लगते हैं। 10 रुपये का बिल कटवाने के बाद ही एक बोतल गर्म पानी मिल पाया। मंडी के जोगेंद्रनगर के रोहित का कहना था कि कैंटीन में चाय के कप के 10 रुपये वसूले जाते हैं। छोटे से डिस्पोजेबल कम में चाय दी जाती है। इससे तो अच्छा है बाजार में जाकर ही चाय पी जाए। जब कैंटीन में भी बाजार के बराबर खाद्य वस्तुएं के दाम वसूले जाएं तो इसका कोई फायदा नहीं है। उन्होंने सरकार व प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।

अस्पताल की कैंटीन में गर्म पानी के पैसे वसूलने की शिकायत नहीं आई है। अगर गर्म पानी के भी पैसे लिए जा रहे हैं तो कैंटीन खोलने का क्या फायदा। अस्पताल में पीड़ित ही आते हैं और गर्म पानी जैसी सुविधा तो निशुल्क दी जा सकती है। इस मामले में कैंटीन मालिक से जवाब मांगा जाएगा।

-डॉ. सुरिंद्र सिंह भारद्वाज, चिकित्सा अधीक्षक, टीएमसी।