हंसराज सैनी, मंडी। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की विनीता कई लोगों की जिंदगी बचा खुद काल का ग्रास बन गई। कुल्लू जिले के मणिकर्ण के पास ब्रह्मïगंगा नाले में पानी के तेज बहाव का शोर सुन विनीता ने कैंङ्क्षपग साइट खाली करवाई। अपनी जान की परवाह किए बिना टेंट में ठहरे पर्यटकों को जगाया और उन्हें सुरक्षित ठिकानों पर भेजा। इससे पहले कि विनीता खुद सुरक्षित जगह तक पहुंचती, सैलाब उसे बहा ले गया।

२५ वर्षीय विनीता पुत्री विनोद कुमार निवासी गांव निसतौली, नजदीक टिल्ला मोड़, लोनी रोड गाजियाबाद यहां अपने दोस्त अर्जुन की कैंपिंग साइट पांच साल से बतौर मैनेजर कार्यरत थी। बुधवार सुबह जल्दी उठने के बाद वह कैंङ्क्षपग साइट में टहल रही थी। तभी ब्रह्मगंगा नाले में अचानक पानी का सैलाब आता देख टेंट खाली करवाने के बाद सामान समेटने लगी। पानी के तेज बहाव ने कैंङ्क्षपग साइट के चार टेंट को अपनी चपेट में ले लिया। पानी से खुद को घिरा देख विनीता मदद के लिए चिल्लाई। उसका दोस्त अर्जुन मदद के लिए पहुंचा भी, लेकिन सैलाब के आगे एक नहीं चली। विनीता को बचाने के चक्कर में अर्जुन भी तेज बहाव में करीब १० मीटर तक बहकर चला गया, लेकिन वह किसी तरह से अपनी जान बचाने में सफल रहा। सैलाब में चार टेंट, रेस्तरां, मोबाइल फोन, रिकार्ड व अन्य सामान बह गया। अर्जुन गंभीर रूप से घायल है। उसे क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू से पीजीआइ चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया है।

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ससुर का कहना माना होता तो पूनम व उसके बेटे की जान पर नहीं बनती

नाले में आए सैलाब से ब्रह्मगंगा गांव के पांच घर पानी से चारों तरफ से घिर गए। गांव की आबादी २५ के करीब है। सुबह लोग अभी नींद से जागे ही थे। इतने में सैलाब आ गया। लोग जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों की तरफ भागने लगे। ज्यादातर लोगों ने घरों की छत पर शरण ली। पूनम अपने बेटे निकुंज व ससुर रोशन लाल के साथ घर में थी। उसका पति घर में नहीं था। रोशन ने बहू पूनम को पोते निकुंज के साथ छत पर आने को कहा, लेकिन पूनम ने इस बात पर कोई गौर नहीं किया। घर से बाहर अन्य किसी सुरक्षित जगह जाने के चक्कर में वह पानी की चपेट में आकर बेटे के साथ बह गई। रोशन घर की छत से बहू व पोते को बहता देखता ही रह गया। यह नाला महज १०० मीटर की दूरी पर पार्वती नदी में मिल जाता है।

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वीरेंद्र पर भारी पड़ा सुरक्षित रास्ता छोड़ पगडंडी से जाना

ब्रह्मगंगा (बरियूना) नाले पर बने एक हाइडल प्रोजेक्ट में कार्यरत वीरेंद्र कुमार को सुरक्षित रास्ता छोड़ पगडंडी से जाना भारी पड़ा। ब्रह्मगंगा नाले का सैलाब उसे अपने साथ बहा ले गया। वह सुबह घर से ड्यूटी के लिए निकला था। हाइडल प्रोजेक्ट तक सुरक्षित रास्ता है। आम लोग व प्रोजेक्ट में कार्यरत सभी लोग सुरक्षित रास्ते से जाते हैं। यह रास्ता थोड़ा लंबा है। स्थानीय होने के कारण वीरेंंद्र अकसर पगडंडी से होकर ड्यूटी जाता था। सुबह पांच बजकर 50 मिनट पर उसकी अपने एक सहकर्मी के साथ मोबाइल फोन पर बात हुई थी कि वह पगडंडी से होकर ड्यूटी आ रहा है। करीब 10 मिनट बाद वह सैलाब की चपेट में आ गया।

Edited By: Vijay Bhushan