हल्दी की खेती से भर रही किसानों की जेब, हिमाचल में बढ़ा रुझान; बैजनाथ के सुनपुर में महिलाओं ने तैयार की फसल
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के बैजनाथ क्षेत्र के सुनपुर गांव के किसान हल्दी की खेती अपनाकर अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं।

बैजनाथ के सुनपुर गांव में महिलाओं ने हल्दी की फसल तैयार की है।
HighLights
सुनपुर गांव के किसान हल्दी की खेती से आय बढ़ा रहे।
सरकार के ₹150/किलो समर्थन मूल्य से किसानों को प्रोत्साहन।
हल्दी की खेती पारंपरिक फसलों का बेहतर विकल्प बनी।
जागरण टीम, धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में जिला कांगड़ा के बैजनाथ क्षेत्र के सुनपुर गांव के किसानों ने हल्दी की खेती को अपनाकर आर्थिकी सुदृढ़ की है। बेसहारा पशुओं और अन्य जंगली जानवरों के कारण पारंपरिक फसलों को होने वाला नुकसान को देखते हुए किसानों ने हल्दी की खेती की ओर रुख किया। हल्दी को बंदर व अन्य जंगली जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। सरकार की ओर से हल्दी के लिए 150 रुपये प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य निर्धारित किए जाने से किसानों का रुझान इस फसल की ओर बढ़ा है।
खाद्य पदार्थों, मसालों और विभिन्न प्रसंस्कृत उत्पादों में व्यापक उपयोग के कारण हल्दी की बाजार में मांग बनी रहती है। ऐसे में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप इसकी खेती किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करने का अवसर प्रदान कर सकती है।
महिला किसानों ने की हल्दी की खेती
बैजनाथ के सुनपुर गांव की किसान प्रवीण कुमारी और सुजाता देवी हल्दी की खेती को बेहतर विकल्प के रूप में देख रही हैं। उनका मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में हल्दी की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का माध्यम बन सकती है। सरकार की ओर से हल्दी के लिए बेहतर समर्थन मूल्य दिए जाने से भी किसानों को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।
एक साल में तैयार, बाजार में खूब मांग
सुनपुर गांव की किसान प्रवीण कुमारी बताती हैं कि उनके खेतों में धान, मक्की सहित विभिन्न फसलों की खेती की जाती है। इस बार उन्होंने पारंपरिक फसलों के साथ हल्दी की खेती भी की है। उनके अनुसार, हल्दी की फसल को तैयार होने में लगभग एक वर्ष का समय लगता है और बाजार में इसकी अच्छी मांग है।
90 से 150 रुपये हुआ भाव
हल्दी की खेती अपनाकर किसान अपनी फसल विविधता बढ़ा सकते हैं और आमदनी के नए अवसर तलाश सकते हैं। प्रवीण कुमारी के अनुसार, हल्दी की खेती के प्रति किसानों की रुचि बढ़ने का एक प्रमुख कारण हिमाचल सरकार द्वारा इसकी कीमत में की गई वृद्धि भी है। पहले हल्दी की कीमत लगभग 90 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जबकि अब इसका समर्थन मूल्य करीब 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। इससे किसानों को बेहतर आमदनी की उम्मीद जगी है।
वैकल्पिक खेती किसानों के लिए नई उम्मीद : सुजाता
सुनपुर गांव की किसान सुजाता देवी भी हल्दी की खेती को किसानों के लिए लाभकारी विकल्प मानती हैं। उनका कहना है कि हल्दी जैसी वैकल्पिक फसल की खेती किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। सरकार की ओर से हल्दी को प्रोत्साहन मिलने और इसके लिए 150 रुपये प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य निर्धारित होने से किसानों को बेहतर आय की संभावना दिखाई दे रही है।
