शिमला, जेएनएन। हिमाचल प्रदेश में खंडों व जिलों में बिना खर्च किए पड़े अरबों रुपये पड़े हैं। विभिन्न विभागों के पास 12 हजार करोड़ पैसा ऐसा है जो खर्च नहीं हो सका है। खंड विकास अधिकारियों के कार्यालयों व जिला उपायुक्तों के पास भी अरबों रुपये कई साल से बिना खर्च किए हुए है। अब प्रदेश सरकार ने खंड विकास अधिकारियों से बिना खर्च किए बजट का ब्यौरा मांगा है। माना जा रहा है कि प्रदेश में डेढ से दो हजार करोड़ रुपये खर्च नहीं हो सका है। इसमें अधिकारियों की उदासीनता भी एक कारण होगी।

बजट खर्च नहीं करने वालों में लोक निर्माण, जल शक्ति, ग्रामीण विकास, पंचायतीराज विभाग सहित डेढ़ दर्जन विभाग शामिल हैं। मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने इस राशि को विकास कार्यों पर खर्च करने की व्यवस्था की है। कोरोना काल के दौरान विकास के लिए बजट की कमी का रास्ता निकाला गया है। 2019 के दौरान एक दर्जन से अधिक सरकारी विभाग बजट खर्च करने में नाकाम रहे थे।

मंडी में वित्त आयोग का 100 करोड़ रुपये

जिला मंडी में 13वें व 14वें वित्त आयोग का 100 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुआ है। दूसरे जिलों में भी प्रशासन के पास बड़ी रकम ऐसी है।

राज्य का विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कोरोना काल में लॉकडाउन से राज्य का विकास बाधित हुआ है। विकास को गति प्रदान करने के लिए बिना खर्च हुए बजट का उपयोग किया जाएगा। -महेंद्र सिंह, मंत्री, जल शक्ति एवं राजस्व विभाग।

नाबार्ड ने की सहकारी बैंकों की 550 करोड़ की वित्तीय सहायता

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने हिमाचल प्रदेश के कृषि और ग्रामीण विकास के लिए तीन सहकारी बैंकों को 550 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। यह वित्तीय सहायता राज्य सहकारी बैंक, केंद्रीय सहकारी बैंक व जोगेंद्रा बैंक को प्राप्त होगी। इस धनराशि से कृषि व ग्रामीण क्षेत्रों में विकास गतिविधियों के लिए सहायता प्राप्त होगी। नाबार्ड स्वयं सहायता समूह और एफपीओ के सदस्यों के माध्यम से मार्च के अंतिम सप्ताह से मई के अंतिम सप्ताह तक लॉकडाउन और कोविड-19 की स्थिति के दौरान भी विभिन्न गतिविधियां जारी रखे हुए है।

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