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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 27, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मलाणा में 15 साल पहले भी हुआ था भयंकर अग्निकांड, जल गए थे 100 से अधिक घर, झकझोर देते हैं कुल्‍लू के ये हादसे

By Rajesh Kumar SharmaEdited By:
Published: Wed, 27 Oct 2021 09:45 AM (GMT+05:30)

Malana Village Fire Incident ऐतिहासिक गांव मलाणा में 15 साल बाद एक बार फि‍र बड़ा अग्निकांड हुआ है। इससे पहले ...और पढ़ें

ऐतिहासिक गांव मलाणा में 15 साल बाद एक बार फि‍र बड़ा अग्निकांड हुआ है।
ऐतिहासिक गांव मलाणा में 15 साल बाद एक बार फि‍र बड़ा अग्निकांड हुआ है।

मंडी, मुकेश मेहरा। Malana Village Fire Incident, ऐतिहासिक गांव मलाणा में 15 साल बाद एक बार फि‍र बड़ा अग्निकांड हुआ है। इससे पहले वर्ष 2006 में लगी आग में पूरा गांव ही जल गया था, इस दौरन 100 से अधिक मकान और प्राचीन ऋषि जमदग्नि का मंदिर भी राख हो गया था। कुल्लू जिला की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां अक्सर अग्निकांड बड़ा रूप ले लेते हैं। काफी वर्षों के बाद मलाणा के लोगों ने एक बार फ‍िर से सपनों के आशियाने खड़े किए थे। लेकिन फ‍िर से भड़की आग ने सबकुछ राख कर दिया।

इससे पहले वर्ष 2015 में बंजार के कोटला में लगी आग में 81 मकान जल गए थे। जिला में हर वर्ष अग्निकांड के कारण करोड़ों की संपत्ति जल जाती है। पुराने अग्निकांड की बात करे तो 2005 में मणिकर्ण के शिल्हा में 30 मकान जल गए थे, सैंज के शांघड़ में 13 मकान, 2007 में मोहन्नी में लगी आग में 48 घर व पशुशालाएं, 2007 में ही भुंतर में छह दुकानें, 2008 में मनाली के सोलंगनाला में पूरा गांव जल गया था। 2009 में निरमंड के जुआनी में 30 घर, 2011 में भी भुंतर में चार दुकानें, 2016 में गाहर में नौ मकान। जिला में पिछले 15 से 18 सालों में अग्निकांड में भारी संपत्ति का नुकसान हो चुका है।

आग लगने के पीछे कारण गांव में घर साथ-साथ होना और लकड़ी के बने होना रहता है। कहीं शार्ट सर्किट तो कहीं घरों के अंदर लगाए गए तंदूर आग लगने का कारण बन जाते हैं। घरों में लकड़ी और घास भी रखा गया होता है, जिस कारण आग तेजी से फैल जाती है। मंगलवार को मलाणा में लगी आग के फैलने का कारण भी यही लकड़ी और घास बना है।

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