मंडी, जेएनएन। नई शिक्षा नीति पर शिक्षकों के पदोन्नत होने पर भी टेट पास करने की शर्त का हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ ने विरोध किया है। वीरवार को वर्चुअल हुई संघ के सभी 22 खंडों के प्रधानों व कार्यकारिणी की बैठक में इसे पॉलिसी को गलत बताया।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए अध्यक्ष अश्वनी गुलेरिया ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत पदोन्नति में टेट की शर्त को अनिवार्य करना शिक्षक हित में नहीं है। इसे लागू करने से पहले शिक्षक व शैक्षणिक हितों को सर्वोपरि रखना होगा। प्रदेश व अन्य कई राज्यों में शिक्षकों के भर्ती एवं पदोन्नति नियम में कुछ पद सीधी भर्ती और कुछ पद पदोन्नति प्रक्रिया से भरे जाते हैं।

सीधी भर्ती से पद भरते समय प्रदेश में टेट पास की शर्त अनिवार्य होनी चाहिए, लेकिन कोई भी शिक्षक बन जाए तो उसके आगामी किसी भी पदोन्नति के लिए टेट अनिवार्यता की शर्त ना लगाई जाए। हिमाचल में पदोन्नति के लिये 5 साल के नियमित सेवा काल की शर्त रखी गई है। इस सेवाकाल को ही टेट के समतुलय माना जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अवगत करवाया जाए ताकि शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और एनसीटीई को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी किया जा सकें।

उन्होंने कहा कि अध्यापक कोरोना काल में भी बेहतरीन सेवाएं दे रहे हैं, ऐसे में शिक्षकों की मांगो पर सरकार

ध्यान दें और टेट अगर कोई एक बारपास कर लेता है तो पांच सालनौकरी के बादउसके पास अनुभव होता है ऐसे में पदोन्नति पर टेट की शर्त समझ से परे हैं। बैठक में जिला महासचिव देवराज शर्मा, वरिष्ठ उपप्रधान दिलीप ठाकुर, कोषाध्यक्ष राजकुमार व महिला विंग अध्यक्ष भारती बहल विशेष उपस्थित रहे।

Edited By: Richa Rana