नीरज व्यास, धर्मशाला

टीबी चैंपियन क्षय रोग के खिलाफ जंग लड़ेंगे। टीबी चैंपियन को स्वास्थ्य विभाग प्रशिक्षित करेगा और उसके टीबी चैंपियन क्षयरोग उन्मूलन अभियान को लीड करेंगे। यह टीबी चैंपियन वह लोग हैं जो क्षय रोग बीमारी की पीड़ा से गुजर चुके हैं और अब स्वस्थ हो चुके हैं।

इस दौरान इन्होंने क्या-क्या सावधानियां व एहतियात बरत कर रोग को जड़ से खत्म किया। इनके व्यक्तिगत अनुभव भी अभियान को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे।

जिला कांगड़ा में ऐसे लोगों की पड़ताल की जा रही है जो क्षयरोग का दंश झेल चुके हैं और अब ठीक हो चुके हैं। लेकिन अब समाज के लोगों को जागरूक करना चाहते हैं। ऐसे लोगों की सूची बनाई जा रही है। सूची बनने के बाद इन लोगों को स्वास्थ्य विभाग प्रशिक्षण देगा।

स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक करेगा कि टीबी होने पर न तो उसे छिपाएं औ न ही घबराएं। दायें बाये या मेडिकल स्टोरों से दवा खाने के बजाय चिकित्सक को दिखाएं व उन्हीं के परामर्श पर स्वास्थ्य लाभ लें।

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जिला कांगड़ा में 31 जुलाई तक 1643 टीबी मरीजों की पहचान की गई है, जबकि 2019 में यह संख्या 3679 थी। संख्या में कमी आने का कारण लॉकडाउन को माना जा रहा है। इस वर्ष अब तक प्रदेश में 8546 टीबी मरीजों की खोज हुई है। जबकि पिछले वर्ष 2019 में यह संख्या 17446 थी। वर्तमान में सीबी नेट मशीन से दो घंटे में टीबी बीमारी का पूरा पता लग जाता है कि बीमारी कितनी पुरानी है। टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार के लिए पांच सौ रुपये प्रति माह मरीज के खाते में डाले जा रहे हैं। जबकि बिगड़ी हुई टीबी के मरीजों को 1500 रुपये दिए जा रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने जहां एक्टिव केस फाइंडिग के लिए आशा कार्यकर्ताओं को ज्यादा सक्रिय कर दिया है।

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क्षयरोग उन्मूलन अभियान को गति देने के लिए जागरूकता लाई जा रही है। इस रोग से प्रदेश को मुक्त करने के लिए 2022 तक का संकल्प है। ऐसे में टीबी चैंपियन को भी टीबी रोगियों को प्रेरित करने के लिए व इस अभियान को गति देने के लिए जोड़ा जा रहा है।

-डॉ. आरके सूद, जिला कार्यक्रम अधिकारी, क्षय रोग उन्मूलन, कांगड़ा।

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