नगरोटा सूरियां, संवाद सहयोगी। Lockdown in Himachal, पंचायत डोल भटेड़ के उपप्रधान व समाजसेवी साधु राम राणा ने कहा कोरोना चेन को तोड़ने के लिए अगर सरकार लॉकडाउन लगाती है तो पहले गरीब असहाय परिवारों के लिए राशन का प्रबंध किया जाए। इसके लिए पूर्व व वर्तमान विधायकों व मंत्रियों के वेतन भत्तों व पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय की कटौती की जाए। उन्होंने कहा हिमाचल प्रदेश में करोना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सरकार द्वारा जो वर्तमान व्यवस्था पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई है और जिसमें कोरोना रोकथाम के लिए लाॅकडाउन लगाने संबंधी भी फैसला सरकार लेने जैसे पग पर विचार या फैसला ले सकती है।

इस गंभीर आपदा से निपटने के लिए लॉकडाउन लगाया जाना सरकार का सही फैसला हो सकता है। लेकिन इस फैसले से कोरोना पॉजिटिव परिवार एवं गरीब परिवारों को रोजी-रोटी से जूझना पड़ेगा। उसकी व्यवस्था पर भी सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में चर्चा एवं निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा गरीब एवं मध्यम वर्ग पहले ही पिछले एक साल से कोरोना के प्रभाव से बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और अब लाकडाउन की परिस्थितियों में गरीब एवं मध्यम वर्ग बिना किसी नियमित आय स्रोत के बगैर संभल नहीं पाएगा और प्रदेश में भूखमरी जैसे हालात पैदा हो जाएंगे।

अतः लाकडाउन लगाने की स्थिति में गरीबों एवं मध्यम वर्ग को सामान्य रूप से खाद्य पदार्थों की आपूर्ति की भरपाई करने के लिए सरकार इस संकट की घड़ी में जनता द्वारा चुने गए पंचायत स्तर से लेकर विधायकों मंत्रियों एवं पूर्व विधायकों के मानदेय एवं वेतन भत्तों व पेंशन को एकमुश्त काटने की व्यवस्था लागू करे, ताकि समाजसेवा के रूप में लिए गए समर्थन के एवज में प्रदेश के जरूरतमंदों को लाभांवित किया जा सके। यदि एक विधानसभा का पंचायत सदस्य से लेकर विधायक तक का एक मास का मानदेय एवं वेतन भत्तों को जोड़ा जाए तो लगभग दस लाख राशि हर विधानसभा क्षेत्र के लिए जुड़ जाएगी और इस राशि से लॉकडाउन में जरूरतमंदों को भी लाभान्वित किया जा सकता है और कोरोना चेन को भी ब्रेक लगाई जा सकती है।

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप