पालमपुर, शारदा आनंद गौतम। जीत का जश्न था, आंखों में ऐसी खुशी थी जिसमें कृतज्ञता भी झलक रही थी। मत प्रतिशत के मामले में देश में दूसरे स्थान पर रहे कांगड़ा के नवनिर्वाचित सांसद किशन कपूर अपने राजनीतिक गुरु और इस चुनाव में सारथी रहे शांता कुमार का आशीर्वाद लेने आए थे। शांता को वादे की दिलाई गई तो उन्होंने इसरार को माना और सुना दिया गाना जो हाल में जनता को लिखे बतौर सांसद आखिरी पत्र में थी था, 'चला जाए अगर माली...चमन नहीं होता खाली। बहारें फिर भी आई थीं, बहारें फिर भी आएंगी।

शांता कुमार और किशन कपूर की यह जुगलबंदी शांता के पालमपुर स्थित यामिनी निवास में रही। किशन कपूर ने उनका अभिवादन किया तो इस जीत का श्रेय भी उन्हें दिया। शांता के निवास स्थान पर मौजूद कपूर संग भाजपा महिला कार्यकर्ताओं ने खुशी के इस पल में शांता कुमार को भी झूमने का आग्रह किया। शांता नाचे तो नहीं, पर उन्होंने गाना गाकर कपूर को मिली जीत पर अपनी खुशी जाहिर की। शांता कुमार सक्रिय चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा तो पहले से ही कर चुके थे, लेकिन उन्होंने किशन के नाम पर हामी भरी थी और पूरे अभियान में उनका साथ दिया था।

शांता कुमार से लोकसभा चुनावों के दौरान धर्मशाला के सिद्धबाड़ी स्थित जोरावर स्टेडियम में भाजपा महिला मोर्चा के सम्मेलन के दौरान चुनावी गानों की सीडी रिलीज करने के अवसर पर कुछ महिलाओं ने उनसे नाचने का आग्रह किया था। शांता ने उस समय वादा किया था कि वह कपूर की जीत के बाद नाचेंगे भी और गाएंगे भी। अब जब किशन कपूर जीत गए तो शांता उनकी जीत पर भले नाचे ना हों, लेकिन कपूर संग उन्होंने गाना गाकर वादा भी पूरा किया और खुशी का इजहार किया। शांता कुमार इस बात पर भी प्रसन्न हैं कि किशन ने रिकॉर्ड लीड से कांगड़ा का किला और मजबूत कर लिया।

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