हिमाचल: दरीणाी में गांव के तीन युवाओं की एक साथ उठी अर्थी, हादसे ने रुलाया; किसी का इकलौता बेटा तो किसी का भाई छिना
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के शाहपुर में एक दर्दनाक सड़क हादसे में झुनैणा गांव के तीन युवकों अशोक, प्रिंस ...और पढ़ें

दरीणी में बाइक हादसे के शिकार हुए तीन युवकों के फाइल फोटो
HighLights
शाहपुर के झुनैणा गांव के तीन युवकों की मौत।
दूली से गुग्गा फेरी से लौटते समय हुआ हादसा।
बाइक खाई में गिरने से अशोक, प्रिंस, पवन की मृत्यु।
सोनू ठाकुर, शाहपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में जिला कांगड़ा के शाहपुर की दरीणी पंचायत की शांत वादियां उस समय चीख-पुकार से गूंज उठीं जब शनिवार शाम करीब सात बजे तीन युवकों के शव झुनैणा गांव पहुंचाए गए। एक ही गांव के तीन नौजवानों के शव देखकर हर किसी के गले से सिसकियां निकल रहीं थी। अपने जिगर के टुकड़ों से लिपटे माता-पिता को यह विश्वास नहीं हो रहा था कि बुढ़ापे में सहारा बनने वाले उनके बच्चे उनको हमेशा के लिए छोड़ कर चले गए हैं। रविवार सुबह जब इन जवान बेटों की अर्थियां उठीं तो हर ओर चीख पुकार मच गई।
गुग्गा फेरी में शामिल होने गए थे युवक
विधानसभा क्षेत्र शाहपुर की दरीणी पंचायत के झुनैणा गांव निवासी तीन युवक नजदीकी गांव दूली में गुग्गा महाराज की फेरी में शामिल होने गए थे। रात को घर आते समय भलेड़ पावर हाउस के नजदीक सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई।
एक ही गांव के तीन युवकों की मौत
मृतकों की पहचान 38 वर्षीय अशोक कुमार, 18 वर्षीय प्रिंस और 30 वर्षीय पवन कुमार के रूप में हुई है। तीनों युवक गांव झुनैणा, ग्राम पंचायत दरीणी, उपतहसील दरीणी और विधानसभा क्षेत्र शाहपुर के निवासी थे।
बाइक खाई में जा गिरी
दरीणी पंचायत के उपप्रधान हंसराज और वार्ड मेंबर राजेश कुमार ने बताया कि बाइक (एचपी 54ए 7983) अशोक कुमार चला रहे थे। वह दूली से तीन किलोमीटर और गांव से 10 किलोमीटर पहले ही भलेड पावर हाउस के समीप पहुंचे थे कि अचानक बाइक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी।
रातभर दर्द से तड़पते रहे युवक
बाइक गिरने से पवन कुमार की मौके पर ही मौत हो गई जबकि अशोक कुमार और प्रिंस गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। गंभीर रूप से जख्मी अशोक कुमार और प्रिंस रातभर दर्द से तड़पते रहे। लेकिन रात को हादसा होने के कारण उनकी चीखें सुनने वाला कोई नहीं था। हादसे का पता सुबह स्थानीय लोगों को चला।
ग्रामीणों के अनुसार अशोक कुमार, प्रिंस और पवन कुमार देर रात को जब घर नहीं लौटे तो स्वजन देर रात तक फोन करते रहे, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। उन्होंने समझा कि वे रात को कहीं परिचित के यहां रुक गए और सो गए हैं।
वहीं, गांव में सावन माह में कौड़ी (पारंपरिक खेल) खेलने की परंपरा है। वे तीनों गांव में रोजाना कौड़ी खेलने के लिए जाते थे। इसको लेकर गांव के लोग भी उन्हें कौड़ी खेलने के लिए फोन करते रहे लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया।
श्रेया के इकलौते भाई थे प्रिंस, दिवांश व नायरा के सिर से उठा पिता का साया
हादसे में तीनों युवक अपना फलता-फूलता परिवार छोड़ गए हैं। 18 वर्षीय प्रिंस दसवीं पास थे और उसकी एक बहन है। वह दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार की जिम्मेदारी उठाने लगे थे। उसकी एकलौती छोटी बहन श्रेया ने इकलौते भाई को करीब एक हफ्ता पहले ही राखी बांधकर सलामती की दुआ मांगी थी लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। वहीं, 38 वर्षीय अशोक कुमार बोटी (रसोइया) का काम करते थे। उनके परिवार में सात साल का लड़का दिवांश, तीन साल की लड़की नायरा व पत्नी हैं। वहीं, 30 वर्षीय पवन कुमार अविवाहित थे। वह भी बोटी का काम करते थे।
