-विडंबना-

-हर साल बरसात में पुल बहने के बाद न्यूगल खड्ड पर अस्थाई पुल बनाते हैं घरथू-कोना गांव के लोग संवाद सहयोगी, पालमपुर : सुलह विधानसभा क्षेत्र के घरथू-कोना गांव के लोगों की यह मजबूरी तो है ही साथ में जज्बा भी कि उन्हें हर साल बरसात खत्म होने के बाद न्यूगल खड्ड पर अस्थाई पुल बनाना पड़ता है। हालांकि पुल बनाने का काम सरकार का है, लेकिन अनदेखी के बाद ग्रामीणों ने इस साल भी खुद ही 20 मीटर लंबा लोहे और लकड़ी का पुल बनाकर तैयार कर दिया है। अब लोग एक घंटे के बजाय 10 मिनट में थुरल बाजार पहुंच जाएंगे।

घरथू-कोना गांव के लोग वर्षो से न्यूगल नदी पर स्थायी पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन वोट लेने के बाद नेताओं ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया। कांग्रेस सरकार के समय कुछ प्रयास हुआ, लेकिन पुल नहीं बना। ऐसे में हर साल खड्ड का जलस्तर बढ़ने से लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। लोगों ने बताया कि सरकार से कितनी बार गुहार लगाने के बावजूद वादे के सिवा कुछ नहीं मिला।

पुल बह जाने पर अकसर ग्रामीणों को बस स्टॉप तक जाने के लिए 5 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। अस्थाईपुल बन जाने से यह दूरी महज आधा किलोमीटर की रह गई है। इस लकड़ी और लोहे के अस्थाई पुल से रोजाना लोग नदी पार कर काम से थुरल बाजार, कॉलेज, बस स्टॉप के लिए आते-जाते हैं। सैकड़ों विद्यार्थी भी रोजाना नदी पार कर दूसरी ओर आते-जाते हैं। हर साल 30 हजार आता है अस्थाई पुल बनाने का खर्च

न्यूगल नदी पर लोहे और लकड़ी का पुल बनाने में लगभग हर साल 25 से 30 हजार का खर्च आ जाता है, जिसे गांव के लोगों ने खुद ही मिलकर वहन कर लेते हैं और यह पुल हर साल बरसात में बह जाता है। पूर्व विधायक जगजीवन पाल ने राजकीय महाविद्यालय थुरल से कोना घरथूं के लिए न्यूगल नदी पर पुल निर्माण लोक निर्माण विभाग के बजट 2015-2016 में शामिल करवाया था। इसकी डीपीआर बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी और अनुमानित बजट भी बना था, जिसका कार्य कोड संख्या 995-307-11188 है। कांग्रेस सरकार बदलने के बाद यह काम आगे नहीं बढ़ा।

Posted By: Jagran

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