जेएनएन, कांगड़ा। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कांगड़ा स्थित टांडा के रेजिडेंट डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मांगों के समर्थन में रेजिडेंट डॉक्टरों ने शुक्रवार शाम से काले बिल्ले लगाकर रोष जताना शुरू कर दिया है। सरकार को मांगों को मानने के लिए सप्ताह का समय दिया है इसके बाद उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अमित राणा व महासचिव डॉ. अभिनव राणा का कहना है कि सरकार ने शर्त रखी है कि पीजी के लिए 10 लाख रुपये का बांड भरने पर ही स्टाइपेंड मिलेगा। उनका कहना है कि ऐसा करके सरकार रेजिडेंट डॉक्टरों से अन्याय कर रही है। इससे सरकार की मंशा साफ है कि गरीब व मध्यम परिवार से संबंध रखने वाला कभी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं बन सकता।

वहीं, उन्होंने आइजीएमसी के रेजिडेंट डॉक्टरों स्टाइपेंड देने व टांडा के डॉक्टरों को तीन माह से इससे वंचित रखने को सरकार की दोहरी नीति करार दिया। उनका कहना है कि टांडा के रेजिडेंट डॉक्टर भी आइजीएमसी के डॉक्टरों की तरह लगातार कई घंटे सेवाएं देकर पीड़ितों को राहत पहुंचा रहे हैं। वहीं, आरडीए के वीरवार रात को हुई बैठक में टांडा मेडिकल कॉलेज प्रशासन से इंटर्न के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेने की मांग की गई। इस संबंध में आरडीए का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को कार्यकारी प्राचार्य डॉ. भानु अवस्थी से मिला व उनसे अनुशासनात्मक कार्रवाई व लगाए गए जुर्माने के निर्णय को वापस लेने का आग्रह किया है। कार्यकारी प्राचार्य ने आरडीए की मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

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