धर्मशाला, मुनीष गारिया। धर्मशाला में हुए पर्यटन मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन में आंबेडकर और बुद्ध सर्किट यानि जहां धर्म से जुड़े हुए मंदिर हैं, उन क्षेत्रों में रेल विस्तार किया जाएगा। केंद्रीय पर्यटन मंत्री किशन रेड्डी की ओर से की गई गई घोषणा का बुद्ध धर्म से संबंधित दलाईलामा मंदिर व अन्य बौद्ध मठ्ठों का लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार की ओर से आंबेडकर सर्किट और पंचतीर्थ के देश के पर्यटन को रफ्तार मिलेगी एवं पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकेगा। वहीं दूसरी आंबेडकर के पदचिन्हों पर भी चलने का प्रयास कर रही भाजपा सरकार पर जनता को विश्वास बढ़ेगा। आंबेडकर सर्किट और पंचतीर्थ का प्रस्ताव सरकार का वर्ष 2016 का है। इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पंचतीर्थ में डा. भीम राव आंबेडकर की जन्मभूमि मध्य प्रदेश महू शामिल हो।

इसके अलावा लंंदन जहां उन्होंने शिक्षा ली, नागपुर में जहां उन्होंने बौद्ध धर्म ग्रहण किया, महापरिनिर्वाण भूमि एवं दिल्ली में उनके निधन का स्थान और मुंबई में उनके दाह संस्कार की जगह जरूरी हैं। आंबेडकर से जुड़े स्थानों में से चार स्थानों में विशेष एसी ट्रेन की सुविधा देते हुए एवं ऐसे स्थानों को बेहतर कनेक्टिविटी देकर भारत में अंबेडकर के पदचिन्हों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। इस योजना से सरकार को ध्येय विचार दलित समुदाय से परे पर्यटकों को आकर्षित करना है, जो ज्यादातर इन स्थानों पर तीर्थ यात्रा के रूप में आते हैं।

धर्मशाला में हुए पर्यटन मंत्रियों की राष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन ही केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने यह बात कही थी कि आंबेडकर व बुद्ध सर्किट में बेहतरीन कनेक्टिविटी सुविधा के लिए सरकार कार्य कर रही है।

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने इन थीम-आधारित पर्यटन सर्किटों को बढ़ावा देने के लिए रेल मंत्रालय के पास 3,000 विशेष रेलवे कोच आरक्षित किए हैं। जहां जहां आंबेडकर व बुद्ध सर्किटों में कनेक्टिविटी की समस्या है उन्हें दूर करने के प्रयास काफी समय से शुरू कर दिए हैं और उसके परिणाम भी आ रहे हैं। आगामी समय में भी इस पर लगातार कार्य जारी रहेगा। प्रयास ये किया जा रहा है कि आंबेडकर और बुद्ध सर्किट के आसपास नजदीकी क्षेत्रों में रेल सुविधा मिल सके, ताकि पर्यटन ट्रेन से उतरकर थोड़ा सड़क मार्ग पर प्रयोग करके ऐसे स्थलों में पहुंच सकें, क्योंकि रेल सफर अन्यों के मुकाबले काफी सस्ता एवं किफायती होता है।

जानकारी के मुताबिक विशेष सर्किट के निर्माण से पर्यटन मंत्रालय को बुनियादी ढांचे, सड़क और रेल संपर्क और आगंतुक सुविधाओं सहित विषय से संबंधित सभी साइटों के व्यापक विकास पर बेहतर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति मिलती है। हालांकि पर्यटक का मानना है कि हर कोई एक बार में सर्किट से संबंधित सभी साइटों पर नहीं जाता है। पर्यटकों के यात्रा के इस तरीके को बदलने के लिए कार्य चल रहा है, ताकि लोग एक बार में पूरे सर्किट की यात्रा कर सकें। पर्यटन मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक सर्किट में एक से अधिक राज्य शामिल होते हैं, वे समय-समय पर एक सर्किट पर विशिष्ट स्थानों पर जाने वाले पर्यटकों की संख्या के आंकड़ों को देखते हैं। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने इन थीम-आधारित पर्यटन सर्किटों को बढ़ावा देने के लिए रेल मंत्रालय के पास 3,000 विशेष रेलवे कोच आरक्षित किए हैं।

इस साल की शुरूआत में आइआरसीटीसी द्वारा रामायण सर्किट पर एक विशेष 14-कोच वाली ट्रेन चलाई गई थी, जिसमें वातानुकूलित थ्री-टियर था। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए एक पेंट्री कार, एक रेस्तरां कार और ट्रेन के कर्मचारियों के लिए एक अलग कोच के साथ है। यहां बता दें कि इससे पूर्व बौद्ध सर्किट के लिए विशेष ट्रेनें भेजी जाती थीं, जो बुद्ध के जीवन से जुड़े गंतव्यों और पूर्वोत्तर सर्किट को भी कवर करती थीं। धीरे-धीरे मंत्रालय इन ट्रेनों के लिए नए, पसंदीदा रूट तैयार कर रहा है। अंबेडकर सर्किट एक ऐसा सर्किट है जिसे सरकार ने इनमें से एक यात्रा के लिए माना है।वहीं केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी दावा किया है कि पिछली सरकारों ने डा. भीमराव आंबेडकर की नजरअंदाजगी की थी। वीपी सिंह की सरकार में डा. आंबेडकर को भारत रत्न दिया गया था। इसके साथ ही नरेंद्र मोदी सरकार ने संसद में उनकी तस्वीर लगाई है। इसके साथ ही उनकी दीक्षा भूमि को भी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है।

Edited By: Richa Rana