संवाद सहयोगी, ज्वालामुखी : ज्वालामुखी मंदिर के अधीन प्राचीन एवं ऐतिहासिक रघुनाथ ईश्वर टेढ़ा मंदिर आज सरकार व प्रशासन की अनदेखी के चलते दयनीय हालत में है। हालांकि मंदिर न्यास ज्वालामुखी ने साढे़ चार वर्ष में लगभग हर बजट में 50 से 60 लाख टेढ़ा मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए रखे, लेकिन साढ़े 4 वर्ष में प्रशासन एक फूटी कौड़ी भी खर्च नहीं कर पाया। 1905 के भूकंप में मंदिर टेढ़ा जरूर हो गया था, लेकिन गिरा नहीं। उसके बाद भी यह मंदिर 117 साल तक यूं ही खड़ा रहा और लोगों की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक बन गया।

ज्वालामुखी मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु तारा देवी मंदिर, भैरव मंदिर, अर्जुन नागा मंदिर, अंबिकेश्वर मंदिर के बाद टेढ़ा मंदिर जाकर यात्रा पूरी करते हैं। मंदिर के जीर्णोद्धार और पुराने हो चुके भवनों का विधायक एवं राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश धवाला दौरा करके देख आए थे और उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए थे कि इस मंदिर को आने जाने वाले दोनों रास्तों की मरम्मत कराई जाए। उन्होंने मंदिर न्यास ज्वालामुखी की बैठक की अध्यक्षता करते हुए 50 से 60 लाख तक मंदिर के जीर्णोद्धार और पुराने भवनों को बदलने, सड़क व सीढि़यों वाले रास्ते की बेहतर मरम्मत करवाने, शहंशाह अकबर की नहर का जीर्णोद्धार करने, बिजली, पानी व शौचालय की व्यवस्था करने के लिए जगह-जगह वर्षाशालिका बनाने के लिए खर्च करने की योजना बनाई थी।

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मैं छुट्टी पर हूं। लेकिन उपायुक्त को मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव भेजा है। स्वीकृति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई हो सकती है।

-मनोज ठाकुर, एसडीएम, ज्वालामुखी।

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साढे़ चार वर्ष से मैं मंदिर न्यास की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए कह रहा हूं लेकिन मंदिर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। इसका कड़ा संज्ञान लिया जाएगा।

-रमेश धवाला, विधायक, ज्वालामुखी।

Edited By: Jagran