नगरोटा सूरियां, जेएनएन। पूर्व सांसद डॉक्‍टर राजन सुशांत ने कहा जब तक पौंग विस्थापितों के पुनर्वास का इकरारनामा सरकार पूरा नहीं करती तब तक इन्‍हें डैम क्षेत्र की खाली भूमि पर फसल बिजाई से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा विस्थापितों के इस मसले को लेकर 10 दिसंबर को उनके नेतृत्व में विस्थापित तपोवन धर्मशाला में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिलेंगे। राजन सुशांत सोमवार को नगरोटा सूरियां में विस्थापितों के जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।

पिछले 47 सालों से विस्थापन का दंश झेल रहे करीब आठ हजार परिवार पौंग झील की खाली भूमि पर फसल बिजाई कर अपने परिवार सहित पशुओं को भी पाल रहे थे, लेकिन पिछले साल से वन्य प्राणी विभाग ने बर्ड सैंक्चुअरी की आड़ में फसल बीजाई पर रोक लगा दी है। राजन सुशांत ने नाम न लेते हुए जवाली के विधायक पर निशाना साधते हुए कहा कि पौंग झील को 1983 में बर्ड सैंक्चुअरी घोषित किया गया था। तब से लेकर अब तक किसानों को किसी ने भी फसल बिजाई से नहीं रोका। लेकिन पिछले साल रोक लगाकर साबित कर दिया कि रोक लगाने वाले विस्थापितों का कितना हित चाहते हैं।

उन्होंने विस्थापितों को कहा कि कल से ही पौंग झील की खाली जमीन पर बिजाई शुरू कर दें। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री से मिलकर विस्थापितों के पुनर्वास सहित एग्रीमेन्ट की शर्तें पूरी नहीं होने तक पौंग की खाली जमीन में फसल बिजाई पर रोक न लगाई जाए, नहीं तो 35 हज़ार किसानों के साथ वह भी गिरफ्तारी देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा राजस्थान को पानी देने के बदले विस्थापितों के पुनर्वास के लिए एक मुश्त राजस्थान के अनूपगढ़ व जैतसर फॉर्म में 2.20 लाख एकड़ भूमि आरक्षित करने का इकरारनामा हुआ था।

हिमाचल ने इकरारनामे के अनुसार राजस्थान को पानी देने की शर्त को पूरा कर दिया है, लेकिन राजस्थान सरकार पुनर्वास की शर्त को अभी तक पूरा नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि जब तक इकरारनामे के मुताबिक विस्थापितों का पुनर्वास नहीं होता तब तक कानूनन विस्थापितों को पौंग की खाली जमीन पर बिजाई पर कोई रोक नहीं लगा सकता। इस अवसर पर पंचायत समिति उपाध्यक्ष बलबीर पठानिया, पंचायत समिति पूर्व अध्यक्ष डॉ रजिंद्र गुलेरिया ने भी विस्थापितों को संबोधित किया।

Posted By: Rajesh Sharma

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