धर्मशाला, जेएनएन। शिक्षण संस्थानों में छात्राओं से छेड़छाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी। दो साल में छात्राओं से छेड़छाड़ के जो मामले हुए उनमें कड़ी कार्रवाई हुई है। सदन में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने नियम 130 के तहत प्रदेश में महिला उत्पीडऩ के मामलों पर नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री के लाए प्रस्ताव में सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पिछले आंकड़ों पर आरोप प्रत्यारोप लगाने से बेहतर है कि दोनों पक्ष महिलाओं के खिलाफ ऐसे मामले रोकने के लिए विचार विमर्श कर ठोस कदम उठाने की रणनीति बनाएं।

मोबाइल फोन जितनी अच्छी सुविधा है, उतना ही आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का साधन है। इसका प्रयोग कैसे करना है, यह खुद सोचने और बच्चों को समझाने की जरूरत है। इससे पहले विपक्ष के बच्चियों से हो रहे छेड़छाड़ मामलों के सवालों पर शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि इससे गुरु-शिष्य के रिश्ते पर धब्बा लगता है। सरकार ने हर स्कूल में पोक्सो एक्ट के तहत कमेटी गठित की है।

दो साल में बच्चियों से छेड़छाड़ की 31 घटनाएं हुई। इनमें दो प्रिंसिपल के खिलाफ भी शिकायत आई। इसके अलावा तीन लेक्चरर, चार टीजीटी, चार पीजीटी, नौ जेबीटी के खिलाफ मामले दर्ज हुए हैं। सभी शिकायतों पर कार्रवाई कर पांच मामलों में आरोपितों को बर्खास्त किया है। स्कूल में मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध लगाने पर सरकार विचार करेगी।

महिला उत्पीडऩ रोकने के मसले पर सत्ता में आई है भाजपा : मुकेश

चर्चा का प्रस्ताव रखते हुए मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि महिला उत्पीडऩ और नशा माफिया पर नकेल कसने के मुद्दे पर भाजपा सत्ता में आई है। कांग्रेस कार्यकाल में कोटखाई प्रकरण हुआ तो भाजपा ने बहुत चर्चा की। कोटखाई मामले में सरकार कार्रवाई क्यों नहीं कर रही। इसके विपरीत मामले में संलिप्त अधिकारियों को बहाल किया जा रहा है। चर्चा में विधायक कर्नल इंद्र सिंह, राजिंद्र राणा, राकेश पठानिया, विक्रमादित्य, राकेश जम्वाल, राकेश सिंघा, सुखराम चौधरी, रमेश धवाला व मोहन लाल ब्राक्टा ने भाग लिया।

दो साल के आंकड़े किए पेश

नेता प्रतिपक्ष ने दो साल में महिला उत्पीडऩ के मामले सदन में रखे। इसमें कहा कि 31 अक्टूबर 2019 तक प्रदेश में 641 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए।

देवी-देवताओं के नाम पर क्रूरता सही नहीं

सरकाघाट मंडी में 80 वर्षीय वृद्धा से क्रूरता मामले में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में 14 आरोपित अभी तक हिरासत में हैं। हिमाचल में देवी-देवताओं के नाम पर क्रूरता सही नहीं है। सीएम ने कहा कि कोटखाई मामला प्रदेश के लिए शर्मनाक था। ये मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए किसी को इसमें ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहिए। मामले के संलिप्त अधिकारियों को बचाया नहीं है, बल्कि उनका निलंबन तीन बार बढ़ाया है। नियमों के अनुसार ही उनका निलंबन समाप्त हुआ है।

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