मुकेश सरमाल, भदरोआ :

एक तरफ तो सरकार प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत मीलों तक सड़क रोजाना बना रही है और अनेकों गांवों को पक्की सड़क से जोड़ रही है। लेकिन यह दावे हवा भी हैं। आंकड़े दिखाकर सरकारें वाहवाही का दम तो भरती हैं, लेकिन विकास खंड इंदौरा के अंतर्गत आती सड़क बलीर-समुन-डैक्वां आंकड़ों पर सवालिया निशान खड़ा कर रही है।

स्थानीय लोग सड़क का निर्माण पूरा होने की राह देख रहे हैं कि कब सड़क बने और घर बनाने के लिए सामान मुहैया हो सके। अगर थोड़ी सी बारिश हो जाए तो सड़क पर पैदल भी नहीं चला जा सकता है। सड़क का निर्माण काफी साल से चला है लेकिन यह सड़क आज तक नहीं बनी जिस कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अगर कोई बीमार हो तो अस्पताल ले जाने के लिए चारपाई का सहारा लेना पड़ता है। यह सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग जसूर को भी जोड़ती है, लेकिन सड़क न होने के कारण लोगों को घूमकर इंदौरा से होकर जसूर जाना पड़ता है। यह सड़क पक्की न होने के कारण 700 ग्रामीण आबादी को प्रभावित करती है।

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सड़क कच्ची होने के कारण जरा सी बारिश होती है तो सड़क पर कीचड़ जमा हो जाता है जिस कारण स्कूली बच्चों के लिए यह मार्ग मुसीबत बना हुआ है।

-अंकुश पठानिया। सड़क कच्ची होने के कारण घर निर्माण के लिए समान घर तक पहुंचाना काफी मुश्किल है जिससे हमें किसी सामान का दोगुना किराया पड़ता है।

-दीपक चौधरी।

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अगर कोई मरीज बीमार हो जाता है तो उसे हॉस्पिटल तक पहुंचाने के लिए 30 से 35 किलोमीटर घूम कर पठानकोट जा नूरपुर जाना पड़ता है अगर ये सड़क बनी होती तो इससे कम से कम 10से 15 किलोमीटर का अंतर पड़ जाएगा।

- अमित पठानिया।

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सड़क की खस्ताहाल के कारण हमारे यहां कोई शादी करने को राजी नहीं है अगर किसी की बेटी की शादी होती है तो गाड़ियां घर तक नहीं पहुंच पाती।

-लफित दीन।

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मामला संज्ञान में लाया गया है। सड़क की जल्द मरम्मत करवा दी जाएगी। युवाओं ने लिखित शिकायत भी दी है इस सड़क को मशीन से ठीक कराने के आदेश दे दिए गए हैं।

-मोहिद्र धीमान, अधिशाषी अभियंता लोनिवि इंदौरा

Posted By: Jagran

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