कांगड़ा, संवाद सहयोगी। मेडिकल कालेज टांडा में बेशक सरकार व अस्पताल प्रशासन की ओर से कमियां सामने आती हैं, परंतु प्रदेश की आम जनता भी इस बड़े स्वास्थ्य संस्थान में गंदगी फैलाने में पीछे नहीं है। संस्थान में पहली से चौथी मंजिल के लिए बनाए गए स्ट्रेचर के रास्ते इन दिनों शौचालय की गंदगी से भरे पड़े हैं, जिससे वहां से गुजरना भी अब दूर्भर हो गया है।

ऐसा नहीं है कि टांडा प्रशासन की ओर से इन रास्तों की साफ-सफाई नहीं करवाई, परंतु रात के अंधेरे का फायदा उठाकर आम जनता ने इन रास्तों का शौचालय का रूप दे दिया है। सरकार की ओर से करोड़ों रुपये खर्च कर संस्थान का निर्माण करवाया व लाखों रुपये खर्च हर ब्लाक में शौचालय का निर्माण भी करवाया, परंतु गंदगी फैलाने की आदत से मजबूर लोग शौचालय भी जाना मुनासिब नहीं समझते। टांडा प्रशासन द्वारा हरेक ब्लाक पर सुरक्षा कर्मी भी तैनात है। इसके विपरीत रात के अंधेरे में लोगों का शर्मनाक आचरण के आगे सुरक्षा कर्मी भी कुछ नहीं कर पाते। कभी कभार कुछ लोग स्ट्रेचर रास्ते पर शौच करते हुए सुरक्षा कर्मियों के हाथों भी चढ़ चुके हैं, परंतु सुरक्षा कर्मी भी इन लोगों को बस चेतावनी दे कर छोड़ देते है।

रोजाना साढ़े तीन क्विंटल बायोमेडिकल वेस्ट

टांडा में रोजाना साढ़े तीन क्विंटल बायोमेडिल व दूसरा कचरा एकत्रित होता है। संस्थान के लगभग 130 सफाई कर्मचारी रोजाना संस्थान की साफ सफाई में जुटे रहते हैं, परंतु आम जनता के बिना सहयोग से संस्थान से गंदगी हटना मुश्किल है।

सफाई कर्मचारी निभा रहे ड्यूटी, लोग रखें स्वच्छता

टांडा एमएस डा. मोहन ने कहा कि संस्थान में रोजाना 2-3 हजार के बीच ओपीडी होती है और रोजाना 4-5 हजार लोग टांडा पहुंचते है। ऐसे में टांडा की साफ सफाई रखना टांडा प्रशासन के लिए चुनौती है। सफाई कर्मचारी कई घंटे ड्यूटी करने के बाद संस्थान को स्वच्छ रखने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है, परंतु साफ सफाई के लिए टांडा में आने वाले लोगों की भी इसमें सहयोग करना चाहिए।

Edited By: Virender Kumar