अश्वनी शर्मा, जसूर

उपमंडल नूरपुर में दो दिन झमाझम बारिश किन्नू (संतरे) के लिए न केवल रस बनकर बरसी है बल्कि इससे अब किन्नू का आकार व स्वाद भी बदलेगा। नूरपुर और आसपास के ज्यादातर क्षेत्रों में ¨सचाई के पर्याप्त साधन न होने के कारण बागवानों को बादलों पर ही आश्रित रहना पड़ता है। यदि समय पर बारिश होती रहे तभी क्षेत्र का किन्नू सही आकार में उतरता है। दिसंबर में हुई बारिश का असर अब किन्नू में दिखेगा। भूमि में नमी न होने के कारण न तो किन्नू का सही आकार बन पा रहा था और न ही किन्नू रसीला व स्वादिष्ट था। नूरपुर क्षेत्र आज से करीब दो दशक पहले संतरे की पैदावार में छोटा नागपुर कहा जाता था। पर्याप्त ¨सचाई सुविधा न होने के कारण साल दर साल उत्पादन में भी गिरावट दर्ज की जा रही है।

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क्षेत्र के अधिकतर बागवान ¨सचाई सुविधा से वंचित हैं। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में हुई बारिश किसानों और बागवानों के लिए राहत लेकर आई है। इससे संतरे के फल को लाभ मिलेगा और उसके आकार व मिठास में बढ़ोतरी होगी।

-गणेश पराशर, बागवान जौंटा।

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अब नूरपुर में पैदावार पर भी संकट खड़ा हो रहा है। जिसका एक प्रमुख कारण ¨सचाई के साधन न होना है। जिला की इस प्रमुख फसल को बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार को कारगर कदम उठाने चाहिए।

-रशपाल पठानिया, बागवान बासा बजीरा।

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करीब डेढ़ दशक पूर्व नूरपुर क्षेत्र संतरे के उत्पादन में छोटा नागपुर जाना जाता था, लेकिन वर्तमान में गिरता भूजल स्तर भी संतरे के बगीचों को सुखाने में आड़े आ गया है। प्रदेश सरकार को वर्षा जल संग्रहण के लिए अधिक से अधिक कार्य करना चाहिए।

-अमित पठानिया, बागवान गनोह।

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सब्जी मंडी जसूर में अन्य राज्यों से भी किन्नू की आमद हो रही है क्षेत्र का किन्नू संतरा बादलों पर ही निर्भर रहता है। यदि समय पर बारिश होती रहे तो ठीक वरना क्षेत्रीय संतरे का सही आकार और पूरी मिठास ही नहीं आ पाती।

-विशंभर दास, मंडी संचालक जसूर।

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जिले में संतरे की पैदावार 3267.75 हेक्टेयर भूमि पर होती है। नूरपुर क्षेत्र में 91.36 हेक्टेयर भूमि पर संतरे की बागवानी की जाती है। ¨सचाई के पर्याप्त साधन व पौधों की उचित देखभाल से ही संतरे की भरपूर फसल ली जा सकती है। क्षेत्र में हुई बारिश फल का आकार और मिठास बढ़ाने के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।

-दौलत राम वर्मा, उपनिदेशक उद्यान विभाग कांगड़ा।

Posted By: Jagran

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