शिमला, राज्य ब्यूरो। हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव अनिल खाची ने कहा है कि विभागीय सचिव सीएम हेल्पलाइन को गंभीरता से लें। सचिव स्तर पर हेल्पलाइन के केस पैंडिंग होना चिंता का विषय है। शिमला स्थित राज्य सचिवालय में शनिवार को ई-आफिस व सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव व विभागों के अध्यक्षों को शीघ्रतापूर्वक ई-आफिस प्रणाली इस्तेमाल करने की सलाह दी।

खाची ने कहा कि आला अधिकारी ई-आफिस में काम करने की आदत डाल लें, ताकि कागज के कम से कम प्रयोग से लाभ हो सकें। ऐसा करने से कार्यकुशलता में सुधार आएगा और एक स्वचालित फाइल वर्क को बढ़ाएगा। ई-आफिस से फाइलों को लाने व भेजने की समस्या खत्म होगी। फाइलों का रिकार्ड रखने की जरूरत नहीं रहेगी। अधिकारी घर से भी कुशलतापूर्वक प्रशासनिक कार्य कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि सरकारी विभागों के 42 लाख दस्तावेज हैं, जिनमें से 20 लाख को स्कैन करने का कार्य हो चुका है। ये दस्तावेज हमेशा के लिए डिजिटल प्लेेटफार्म पर उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने इस बात पर भी ङ्क्षचता जाहिर की कि सीएम हेल्पलाइन के तहत आने वाली शिकायतों में लेवल वन व लेवल टू की निगरानी नहीं हो रही। सभी अधिकारियों को चाहिए कि अपने स्तर पर लंबित पड़े मामलों की निगरानी करें। ऐसा करने से शीघ्र शिकायतों का निपटारा होगा। निचले स्तर पर जो कर्मचारी व अधिकारी कोताही बरत रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई तय हो सकेगी।

खाची ने कहा कि सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त होने वाली शिकायतों का सफलता प्रतिशत 65-66 फीसद है, जोकि बहुत अच्छा है, इससे प्रमाणित होता है कि सभी स्तर पर लोगों की समस्याओं की सुनवाई हो रही है। लेकिन, इसमें सुधार करने से लोगों को अधिक लाभ प्राप्त होगा।

Edited By: Vijay Bhushan