इंदौरा, रमन कुमार। समूचे मंड क्षेत्र और इंदौरा क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ सुविधाएं मुहैया करवाने वाले सिविल अस्पताल इंदौरा की दो मंजिला इमारत में एक भी फायर हाइड्रेट स्थापित नहीं किया गया है। इंदौरा के हर एक कोने में अग्निशमन यंत्र तो स्थापित किए गए है, जोकि सुरक्षा की दृष्टि ने न काफ़ी है। इंदौरा में स्थापित अग्निशमन यत्रों की नियमित तौर पर जांच भी नहीं हो पा रही है। कुछ अग्निशमन यंत्रों को एक्सपायरी तिथि के एक साल बाद तक भी वहीं पर स्थापित किया गया है और कुछ अग्निशमन यंत्रो की अक्सपायरी तिथि अभी हाल ही में हुई है।

कागजो में 50 बेड के इस सिविल हास्पिटल में अभी तक मात्र 8 बेड ही स्थापित हैं, परंतु प्रतिदिन यहां पर स्वास्थ सुविधाओं का लाभ लेने वालों का तांता लगा रहता है। इसीलिए इस सिविल हॉस्पिटल की रोजाना ओपीडी 150-200 तक होती है। अब देखने योग्य बात यह है कि सिविल अस्पताल की इस बहुमंजिला इमारत में आग लगने जैसी आपतकालीन स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के इंतजाम शून्य के बराबर है। सिविल हास्पिटल परिसर में स्थापित एक्स रे और फार्मेसी विभाग में अगर कभी आग लगने जैसी गंभीर स्थिति बनती है तो जब तक अग्निश्मन विभाग की गाड़ी नूरपुर या 9-एफओडी कंदरोड़ी से आएगी तब तक तो लाखों का नुकसान हो सकता है।

अस्पताल में अग्निकांड जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए न किसी सुरक्षा कर्मी की तैनाती की गई है। हमारे देश के माननीय उच्चतम न्यायलय के आदेशानुसार प्रत्येक अस्पताल में फायर हाईड्रेट की व्यवस्था होनी चाहिए। अस्पताल भवन में लाखों रुपये की मशीनरी और प्रति वर्ष एक करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान रोगी कल्याण समिति की तरफ से किया जाता है। अग्निकांड जैसी आपत्कालीन स्थिति से निपटने के लिए असुविधा का आलम इस प्रकार है कि अस्‍पताल प्रशासन द्वारा फायर अलार्म तक की सुविधा भी नहीं है। समय रहते अगर स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो इसका खामियाजा आम लोगों को आवश्यक ही भुगतना पड़ सकता है। उधर खंड चिकित्सा अधिकारी इंदौरा संदीप महाजन ने बताया कि फिलहाल सिविल अस्पताल इंदौरा में फायर हाइड्रेंट की कोई व्यवस्था नहीं है, परंतु अस्पताल परिसर में अग्निशमन यंत्र स्थापित किए गए है।

Edited By: Richa Rana