करुणेश शर्मा, ज्वालामुखी

धार्मिक नगरी ज्वालामुखी में अतिक्रमण से मटौर-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग सिकुड़कर रह गया है। इससे हर रोज वाहन चालकों को हादसे का डर सताता रहता है। हैरानी की बात यह है कि जिस मिनी सचिवालय में बड़े अधिकारी बैठते हैं उसके बाहर ही एनएच पर अतिक्रमण हो चुका है, लेकिन किसी ने भी इस संबंध में कार्रवाई के लिए जहमत नहीं उठाई है। प्रशासन की मेहरबानी से कब्जाधारक पहलवान बन गए हैं यानी उनकी पकड़ मजबूत हो गई है। यही वजह है कि ज्वालामुखी में एनएच पर जाम रहता है।

ज्वालामुखी बस अड्डे के पास मिनी सचिवालय के बाहर कई लोग अतिक्रमण कर दुकानदारी चमका रहे हैं। इन लोगों को अधिकारियों या राजनेताओं का संरक्षण है, तभी तो कब्जाधारकों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। स्थानीय लोगों ने भी इस व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने प्रशासन से अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

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अन्य राज्यों के लोग यहां रेहड़ी फड़ी लगाकर बैठ जाते हैं। इससे स्थानीय लोगों के काम धंधे पर बुरा असर पड़ रहा है। साथ ही हादसे की भी संभावना बनी रहती है। प्रशासन को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए।

-कुलदीप शर्मा।

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राष्ट्रीय राजमार्ग पर अतिक्रमण अपने आप में बहुत बड़ा खतरा है। यहां पर वाहन तेज गति से आते-जाते हैं और कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इस दिशा में आवश्यक कदम उठाया जाना चाहिए।

-केहर सिंह ठाकुर।

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राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। इससे दुर्घटना का भय रहता है और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को चलने-फिरने में भी दिक्कत होती है।

-आरती राणा।

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राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे सरकार ने किसी प्रकार के अतिक्रमण पर प्रतिबंध लगाया है। स्थानीय प्रशासन न जाने किसके आदेश की प्रतीक्षा कर रहा है। कब्जाधारकों पर जल्द कार्रवाई होनी चाहिए।

-राहुल शर्मा।

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मैं अभी अवकाश पर हूं। ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद ही इस संबंध में कड़ा संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाएगी।

-मनोज ठाकुर, एसडीएम ज्वालामुखी

Edited By: Jagran