धर्मशाला, अजय अत्री। Himachal New Sports Policy, करीब 19 साल बाद आखिरकार हिमाचल को नई खेल नीति मिल गई। खेल और खिलाडिय़ों की बेहतरी के लिए सरकार के इस कदम की प्रशंसा की जानी चाहिए। नई खेल नीति में एक ही संघ बनाने के अतिरिक्त डाइट मनी दोगुना करना, खिलाडिय़ों को रोजगार के लिए पात्र बनाना, नए पुरस्कार शुरू करना एवं पदक विजेताओं को पेंशन जैसे प्रविधान नि:संदेह खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित करेंगे। खेल संघों को नेताओं और वर्षों से अध्यक्ष पद की कुर्सी पर कब्जा जमाए बैठे लोगों से छुटकारा मिलेगा। पूर्व खिलाड़ी को ही अध्यक्ष पद सौंपा जाएगा। बेशक यह बात अच्छी हो लेकिन यह जरूरी नहीं कि जो खिलाड़ी मैदान पर अच्छा हो वो खेल प्रशासक भी कुशल ही साबित होगा?

नई खेल नीति को मंत्रिमंडल से मंजूरी मिल गई है, अब जरूरत इस बात की है कि नई खेल नीति के रूप में जो भी कुछ लिखा या कहा गया है उसे जमीन पर भी उतारा जाए। प्रदेश की यह खुशकिस्मती है कि इस वक्त केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर हैं वहीं प्रदेश में भी इस महत्वपूर्ण विभाग की बागडोर तेजतर्रार मंत्री राकेश पठानिया के हाथ में हैं।

उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रदेश की प्रतिभाओं का भविष्य संवरेगा और आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पहाड़ी राज्य के खिलाड़ी ज्यादा से ज्यादा नजर आएंगे। नई खेल नीति में जिस बात पर अधिक जोर दिया गया है वह है ग्रामीण प्रतिभाओं की पहचान करना। देखा गया है कि गांव के युवाओं के अंदर कुदरती ताकत छुपी होती है। उन्हें जरूरत तकनीकी रूप से दक्ष बनाने की है। अगर सही प्रशिक्षण मिले तो वह ओलिंपिक जैसे विश्वस्तरीय आयोजनों में देश का गौरव बढ़ा सकते हैं।

हरियाणा के गांवों के एथलीटों की कामयाबी इसका सशक्त उदाहरण है। अगर प्रदेश सरकार खेल नीति में लिखित प्रविधानों के तहत एक वृहद योजना बनाकर काम करे तो प्रदेश के ग्रामीण अंचल से कई प्रतिभाएं निकलेंगी, यह तय है। खिलाडिय़ों को सरकारी नौकरी में तीन फीसद आरक्षण और घायल होने पर एक लाख का बीमा कवर देेने का प्रविधान भी खेल और खिलाड़ी की बेहतरी के लिए अच्छा कदम है।

खेल संघ और सरकार जब तक एक मंच पर न हों तब तक खेल के विकास की बात बेमानी है। इसलिए खेल संघों और सरकार के बीच समन्वय बनाए रखने के लिए एक खेल विशेषज्ञ की भी नियुक्ति की जाए तो यह बेहतर रहेगा।

खेल नीति में खिलाडिय़ों के रोजगार और पेंशन देना भी सराहनीय है। खिलाड़ी बहुत मुश्किल और संघर्ष के बाद ही आगे बढ़ता है। उसका करियर भी ज्यादा लंबा नहीं होता। ऐसे में अगर उपलब्धि के अनुसार रोजगार मिले तो वो एकाग्र होकर लक्ष्य की और बढ़ेगा। साथ ही खेलों का ऐसा वर्गीकरण नितांत आवश्यक है, जिससे ओलंपिक और विश्वस्तर पर खेले जाने वाले खेलों के खिलाडिय़ों को ज्यादा सुविधाएं मिल सकें। यदि एक खिलाड़ी के खाते में बड़ी उपलब्धि हो तो उसे नौकरी उसी के अनुरूप मिलनी चाहिए।

दिव्यांग खिलाडिय़ों के लिए साहसिक खेल का प्रविधान भी नई खेल नीति का हिस्सा है। इससे प्रतिभाओं की हौसला अफजाई होगी। गांवों से शहरों तक नए स्टेडियम बनाने की योजना भी खेल की बेहतरी के लिए अच्छा कदम माना जाएगा वहीं स्पोट्र्स ट्रेनिंग डेस्टिनेशन बनाने की भी बात की जा रही है। बेहतर मैदान, अच्छा प्रशिक्षण, अच्छा खाना मिलने के साथ अगर खिलाडिय़ों को रोजगार की गारंटी मिले तो निश्चित ही खेल और खिलाडिय़ों का विकास होगा।

Edited By: Rajesh Kumar Sharma