मैड़ी, जागरण संवाददाता। उपमंडल अम्ब के तहत पंचायतों में चल रहे मनरेगा कार्यो में दिहाड़ी लगाकर परिवार का पालन पोषण कर रहे मजदूरों को अब खाने के लाले पड़ने शुरू हो गए हैं। मनरेगा में कार्य करने के बाद दो से तीन महीनें होने के बाद भी मजदूरों की मजदूरी का भुगतान उनके खातों में अभी तक नहीं हो पाया है। जिसके बाद अपनी मेहनत के पैसे पाने के लिए लोग इधर उधर भटक रहे है। लेकिन कहीं भी उनकी इस समस्या का हल निकलता दिख नहीं रहा। लिहाजा वो हर जगह पर निराश हो रहे हैं।

 सरकार के वादे अनुसार मनरेगा मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान मस्टरोल के जमा होने के पंद्रह दिनों के भीतर करना होता है। बादजूद इसके सरकार इस समस्या को हल करने के मूड में नहीं दिख रही। वहीं मनरेगा में काम करने के बाद लोगो को अपनी मेहनत से कमाई पूंजी को पाने के लिए लम्बा इंतज़ार करना पड़ रहा है। लिहाजा इसके लिए कहीं न कहीं सरकार का ढुलमुल रवैया देखने को मिल रहा है। इससे कामगारों में रोष है उनका कहना है की उनके द्वारा मेहनत करके यह दिहाड़िया लगाई गई है। उसके उपरांत अभी डेढ़ से दो माह बीत जाने से बाद भी खातों में उनकी मजदूरी नहीं आई है।

वहीं, मनरेगा में काम करने के बाद हाकम राय, सीता राम,लेख राज,जसविंदर कौर सतपाल, रवि , राकेश ने का कहा कि पिछले तीन महीनों से उनके पैसे नहीं मिल रहे है। बिना पैसो से उन्हें आर्थिक तौर पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वह बार बार अपने बैंक खातों को चेक भी करवा रहे हैं। परन्तु अभी तक उन पैसो का भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि मेहनत करने के बावजूद भी दिहाड़ियों का भुगतान ना हो कता ऐसे काम को करने का फायदा है।

क्या कहते है खंड विकास अधिकारी:

खंड विकास अधिकारी अम्ब सुदर्शन सिंह का कहना है कि मनरेगा के तहत कामगारों को केंद्र उनके खातों में सीधा भुगतान करता है। पैसे कामगारों के खातों ने कब आएंगे ये अभी बता नही सकते। लेकिन जैसे ही केंद्र से फंड जारी होगा, मनरेगा वर्कर को उनके खातों में पैसा सीधा आ जाएगा।

Edited By: Richa Rana