नगरोटा सूरियां, जेएनएन। महाराणा प्रताप सागर पौंग झील में सर्दी बढ़ने के साथ प्रवासी पक्षियों की संख्या भी बढ़ने लगी है। प्रवासी पक्षी अपनी क्लोलों से पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। प्रदेश ही नहीं अन्य राज्यों से भी लोग पौंग झील में प्रवासी पक्षियों को देखने आ रहे हैं। विभाग के मुताबिक झील में प्रवासी पक्षियों की संख्या का सही अनुमान जनवरी में आधिकारिक गणना से लगेगा।

अनुमान के अनुसार अभी तक एक लाख के करीब प्रवासी पक्षी पौंग में पहुंच चुके हैं। हर साल साईबेरिया, तिब्बत व मध्य एशिया में बर्फबारी तथा ठंड बढ़ने से हजारों किलोमीटर उड़ान भरने के बाद प्रवासी पक्षी यहां पहुंचते हैं। ये मार्च के मध्य तक प्रवास करते हैं और फिर लौट जाते हैं।

कितनी प्रजातियों के कितने पक्षी

वन्य जीव संरक्षण विंग के अधिकारियों के मुताबिक अब तक 57 प्रजातियों के करीब एक लाख प्रवासी पक्षी झील में पहुंच चुके हैं। विभाग के मुताबिक सर्वाधिक पक्षी नार्थन पिनटेल 8800, कामन कूट्स 6050, लिटल कार्मोरेंट 2700, कामनटेल 1000, पोचार्ड 1000, शैवलर डक 100, ब्लैक हैडिड गीज 250, स्पॉट विल डक 160, कामन पोचार्ड 150, रुडी शेल्डेक 500, लिटिल इगरिट 200, लिटिल ग्रेप 100, रीवर किग 100 आदि पौंग झील में डेरा जमा चुके हैं। हर साल इन परिंदों की आधिकारिक गणना जनवरी में की जाती है। इस दौरान प्रवासी पक्षियों को काल रिंग व ट्रांसमीटर भी लगाए जाते हैं।

प्रवासी मेहमानों की सुरक्षा की सुरक्षा के लिए 24 टीमों का गठन किया गया है। इनके शिकार पर कड़ी नजर रखी जाती है। यदि कोई इनका शिकार करता है तो कड़े दंड का प्रवाधान है।

-कृष्ण कुमार, डीएफओ, वन्य प्राणी संरक्षण विभाग 

Posted By: Babita

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