शिमला, जेएनएन। शिमला-मटौर फोरलेन निर्माण पर केंद्र सरकार का रुख पलटने से जमीन दे चुके किसानों की चिंता बढ़ गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने ज्वालामुखी से कांगड़ा तक बनने वाले फोरलेन के लिए किसानों से जमीन का अधिग्रहण तो कर लिया है, मगर भुगतान नहीं किया है। नादौन में भूमि अधिग्रहण करने वाले अधिकारियों के लिए खोला गया ऑफिस बंद कर दिया गया है। इससे किसान चिंतित हो गए हैं कि अब क्या होगा? पांच हिस्सों में बांटे गए इस फोरलेन का निर्माण कार्य शिमला से शुरू करने की बजाय कांगड़ा से किया गया है।

बताते हैं अब 25 सितंबर को हिमाचल में प्रस्तावित तीसरे फोरलेन के लिए निविदा खोली जानी प्रस्तावित है। इसके बाद स्थिति स्पष्ट होगी। वहीं, एनएचएआइ अधिकारियों के मुताबिक फोरलेन का कार्य बंद नहीं हुआ है। कुछ समय के लिए लंबित किया गया है। इस कारण काम की गति धीमी हुई है।

शिमला से क्यों शुरू नहीं हुआ कार्य

शिमला-मटौर फोरलेन का निर्माण कार्य योजना के मुताबिक शिमला से शुरू होना था। लेकिन इसकी शुरुआत अंतिम छोर कांगड़ा से हुई। शिमला की ओर से ऊंचे पहाड़ होने के कारण शिमला से शालाघाट व शालाघाट से नौणी चौक बिलासपुर के दो हिस्सों के लिए 1500 करोड़ रुपये अनुमानित खर्च रखा था। उसके बाद भगेड़ से हमीरपुर, हमीरपुर से ज्वालामुखी और ज्वालामुखी से मटौर तक एक-एक हजार करोड़ रुपये खर्च प्रस्तावित है।

एनएचएआइ पूरा करेगा कीरतपुर से बिलासपुर फोरलेन का काम

कीरतपुर से बिलासपुर तक फोरलेन का निर्माण बीओटी के आधार पर करवाया जा रहा था। अब कंपनी काम छोड़कर चली गई है। अधूरे निर्माण को अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने अपने हाथ में ले लिया है। एनएचएआइ दो साल से लटके इस कार्य को पूरा करना चाहती है ताकि नेरचौक तक वाहनों की आवाजाही शुरू हो सके।

नादौन का भूमि अधिग्रहण कार्यालय बंद नहीं किया गया है। कुछ समय के लिए लंबित किया है। फोरलेन का कार्य बंद नहीं केवल धीमा हुआ है। जिन किसानों की जमीन फोरलेन निर्माण के लिए अधिगृहीत की गई है, उनको भुगतान किया जाएगा। -योगेश राउत, निदेशक फोरलेन प्रोजेक्ट हमीरपुर कार्यालय।

Posted By: Rajesh Sharma

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